तेलंगाना हाई कोर्ट ने ब्रह्मोस के महानिदेशक की नियुक्ति रद्द करने का ट्रिब्यूनल आदेश किया निलंबित
हैदराबाद, 07 जनवरी (हि.स.)। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बुधवार को हैदराबाद के केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के उस आदेश को अंतरिम रूप से निलंबित करने का आदेश दिया, जिसमें 29 दिसंबर को ब्रह्मोस एयरोस्पेस के महानिदेशक डॉ. जयतीर्थ जोशी की नियुक्ति को
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Bhahmo


हैदराबाद, 07 जनवरी (हि.स.)। तेलंगाना उच्च न्यायालय ने बुधवार को हैदराबाद के केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण के उस आदेश को अंतरिम रूप से निलंबित करने का आदेश दिया, जिसमें 29 दिसंबर को ब्रह्मोस एयरोस्पेस के महानिदेशक डॉ. जयतीर्थ जोशी की नियुक्ति को रद्द कर दिया था।

मुख्य न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह और न्यायाधीश जीएम मोहिउद्दीन की खंड पीठ ने यह आदेश केंद्र सरकार और ब्रह्मोस एयरोस्पेस के महानिदेशक डॉ. जयतीर्थ जोशी की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया। बेंच ने उन प्रतिवादियों को चार हफ्तों में काउंटर फाइल करने का निर्देश दिया, जिनके पक्ष में ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाया था। इसने सरकार और दूसरी पार्टियों को काउंटर पर जवाब दाखिल करने के लिए दो और हफ्ते दिए और मामले को आगे की सुनवाई के लिए टाल दिया।

डॉ. जयतीर्थ आर. जोशी ने 1 दिसंबर, 2024 को ब्रह्मोस एयरोस्पेस के महानिदेशक का पदभार संभाला था। वे मिसाइल प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक प्रख्यात वैज्ञानिक हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के लिए लंबी दूरी और मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के डिज़ाइन और विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

डीआरडीओ के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. एस. शिवसुब्रमण्यम नांबी नायडू ने दायर याचिका में तर्क दिया था कि वरिष्ठता, अनुभव और पदानुक्रम के बावजूद उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया, जबकि उनसे जूनियर अधिकारी को ब्रह्मोस एयरोस्पेस में महानिदेशक के रूप में नियुक्त कर दिया गया।नायडू की याचिका का निपटारा करते हुए ट्रिब्यूनल ने जोशी की नियुक्ति को रद्द करने के आदेश दिए थे। केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण ने रक्षा मंत्रालय को उनकी जगह एक इंचार्ज को नियुक्त करने का निर्देश दिया था, जब तक कि इस मामले का आखिरी फैसला न हो जाए।

जब यह मामला तेलंगाना उच्च न्यायालय के सामने आया, तो सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता वर्चुअली पेश हुए। उन्होंने बेंच को बताया कि मौजूदा नियुक्ति को एक चयन समिति ने फाइनल किया था, जिसमें वरिष्ठ केंद्र सरकार के अधिकारी और विशेषज्ञ शामिल थे। यह नियुक्ति न सिर्फ वरिष्ठता को ध्यान में रखते हुए की गई थी, बल्कि भारत और रूस के बीच एक जॉइंट वेंचर ब्रह्मोस मिसाइल प्रोजेक्ट और कई दूसरी बातों को भी ध्यान में रखते हुए की गई थी।

जोशी की ओर से पेश सीनियर वकील एस निरंजन रेड्डी ने दलील दी कि चयन मानदंड के अनुसार ऐसे व्यक्ति को चुनना था, जिसमें नेतृत्व करने की काबिलियत हो, प्रबंधन की काबिलियत हो, कॉर्पोरेट मामलों की जिम्मेदारी हो और ब्रह्मोस जैसे इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स को संभालने का अनुभव भी हो। इन दलीलों को रिकॉर्ड करते हुए बेंच ने उनकी नियुक्ति को फिलहाल रोक दिया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / नागराज राव