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जयपुर, 08 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि प्रदेश के निजी स्कूलों को प्री-प्राइमरी से फस्र्ट क्लास तक आरटीई के तहत प्रवेश देना होगा। निजी स्कूल इन कक्षाओं में से जिस भी कक्षा में विद्यार्थियों को प्रवेश देती है, उस कक्षा में 25 फीसदी सीटों पर आरटीई के तहत प्रवेश देने होंगे। एक्टिंग सीजे संजीव प्रकाश शर्मा और जस्टिस बीएस संधू की खंडपीठ ने यह आदेश अभ्युत्थानम सोसायटी व अन्य की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। वहीं अदालत ने मामले में राज्य सरकार और निजी स्कूलों की अपील को खारिज कर दिया है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि यदि स्कूल पहली कक्षा में अतिरिक्त सीटों पर सामान्य प्रवेश दे रहे हैं तो उसी अनुपात में 25 फीसदी सीटों पर आरटीई के तहत भी प्रवेश दिए जाएगे। अदालत ने मामले में गत 4 नवंबर को सभी पक्षों की बहस सुनकर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
जनहित याचिका में राज्य सरकार के साल 2020 की अधिसूचना को चुनौती दी गई थी। अधिसूचना में कहा गया था कि निजी स्कूलों को आरटीई के तहत केवल पहली कक्षा में प्रवेश देने पर ही फीस का पुनर्भरण किया जाएगा। अधिवक्ता रिद्धि ने बताया कि कई स्कूलों में प्री-प्राइमरी कक्षाएं होने के कारण उनमें पहली कक्षा से पहले ही प्रवेश हो जाता है। जिसके चलते स्कूल आरटीई में प्रवेश नहीं देते। वहीं स्कूल प्रशासन की ओर से कहा गया कि स्कूलों के संसाधन सीमित हैं और राज्य सरकार ने फीस के पुनर्भरण को लेकर 2009 से लेकर अब तक कोई नियम नहीं बनाए हैं। वहीं राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता सुरेंद्र सिंह नरूका ने कहा कि प्री प्राइमरी व पहली कक्षा दोनों लेवल पर आरटीई में प्रवेश हो तो प्री प्राइमरी में होने वाले प्रवेशों के लिए भी केन्द्र सरकार से निर्धारित फीस की पुनर्भुगतान राशि राज्य को दिलाई जाए। दूसरी ओर केन्द्र सरकार की ओर से कहा गया था कि आरटीई में प्रवेश की व्यवस्था की जिम्मेदारी राज्यों की है, केन्द्र की नहीं। सभी पक्षों की बहस सुनने के बाद अदालत ने विस्तृत दिशा-निर्देश देते हुए निजी स्कूलों और राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक