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डूंगरपुर, 07 जनवरी (हि.स.)। जिले में भोले-भाले आदिवासियों, मजदूरों और कॉलेज छात्रों को सरकारी योजनाओं का झांसा देकर उनके बैंक खातों का उपयोग अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी में करने वाले एक बड़े गिरोह का डूंगरपुर पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार के निर्देशन में चलाए जा रहे विशेष अभियान 'ऑपरेशन साइबर हंट' के तहत साइबर थाना पुलिस ने लंबी फरारी काट रहे वांछित आरोपित मनीष कलाल पुत्र विनोद कलाल, निवासी इंद्रखेत को गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है।
पुलिस जांच में सामने आया है कि यह गिरोह बेहद शातिर तरीके से काम करता था। आरोपित गांव के गरीब मजदूरों और कॉलेज विद्यार्थियों को टारगेट करते थे। उन्हें फ्री में पैन कार्ड बनवाने, जीरो बैलेंस पर खाता खुलवाने, सरकारी योजनाओं से स्कॉलरशिप दिलाने या लोन दिलाने का झांसा दिया जाता था। विश्वास जीतने के लिए गिरोह के साथ बैंक कर्मचारी कौशल प्रजापत भी साथ जाता था, जिससे लोग आसानी से झांसे में आ जाते थे।
खाता खुलने के बाद यह गिरोह खाताधारक से पासबुक, चेकबुक, एटीएम और नेट बैंकिंग के आईडी-पासवर्ड वाली 'किट' अपने पास रख लेता था। इसके बाद ये किट दुबई, कुवैत और जॉर्जिया में बैठे मुख्य सरगनाओं को भेज दी जाती थी। वहां से टेलीग्राम और व्हाट्सएप के जरिए शेयर मार्केट, ट्रेडिंग, क्रिप्टो करेंसी और ऑनलाइन बैटिंग (सट्टा) एप के जरिए देश भर के लोगों से ठगी कर राशि इन खातों में जमा कराई जाती थी। बाद में भारत में बैठे गुर्गे बैंक कर्मियों की मिलीभगत से पैसा निकालकर आपस में कमीशन बांट लेते थे।
मामले का खुलासा तब हुआ जब बथड़ी निवासी लालशंकर रोत ने रिपोर्ट दर्ज कराई। उसे विक्रम और उसके साथियों ने फ्री पैन कार्ड का झांसा देकर खाता खुलवाया और किट ले ली। बाद में पता चला कि उसके खाते से करीब 81 लाख 69 हजार 707 रुपये का संदिग्ध लेन-देन हुआ है। पुलिस ने जांच की तो पता चला कि अकेले इस गिरोह ने इंडसइंड, एचडीएफसी, एसबीआई समेत विभिन्न बैंकों में करीब 450 से अधिक खाते खुलवा रखे थे।
एसपी मनीष कुमार द्वारा गठित विशेष टीम ने करीब 450 बैंक खातों का गहन विश्लेषण किया और साइबर ठगी के इस मकड़जाल को तोड़ा।
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हिन्दुस्थान समाचार / संतोष