सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
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सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश


नैनीताल, 12 अगस्त (हि.स.)। उच्च न्यायालय ने प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की रिपोर्ट का संज्ञान लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद मामले की अगली सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तिथि नियत की है।

कोर्ट ने स्वास्थ्य सुविधाओं को दुरूस्त करने को लेकर स्वास्थ्य सचिव को प्लान पेश करने को कहा है। कोर्ट ने राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं का संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य सचिव से पूछा कि सरकार ने वर्तमान में कई हॉस्पिटलों से जानकार डाक्टरों का स्थानांतरण कर दिया। लेकिन उन हॉस्पिटलों में उनकी जगह कोई स्पेस्लिस्ट डाक्टर की नियुक्ति नही की गई। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से पूछा कि किस हॉस्पिटल में क्या स्वास्थ्य सुविधा की कमिया है। सुनवाई पर स्वास्थ्य सचिव व अन्य अधिकारी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। उनके द्वारा कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश कि स्वास्थ्य सुविधाएं सुचारु रूप से चल रही है। रिक्त व स्थानांतरण हुए डाक्टरों के पदों पर शीघ्र सरकार व स्वास्थ्य विभाग नियुक्ति करने जा रही है।

आकड़ों के मुताबिक जिला हॉस्पिटल नैनीताल में आईसीयू में भर्ती करने की पूरी सुविधा उपलब्ध है। जिस पर कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से कहा कि आज आप नैनीताल में है तो वे एक बार इसका मौका मुआयना करें। आंकड़े सही हैं या वर्तमान स्थिति। कोर्ट ने कहा कि एक इसीजी के लिए यहां हल्द्वानी मरीज को रेफर किया जाता है। आपके कागजों में सब कुछ उपलब्ध है। कोर्ट ने कहा कि नैनीताल सेनेटोरियम हॉस्पिटल को सुपर स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल बनाए जाने के लिए अगली तिथि तक अप्रूवल रिपोर्ट पेश करें।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। न्यायमित्र की तरफ से कोर्ट में कहा गया कि राज्य सरकार ने बीते दिनों राजकीय मेडिकल कालेज सुशीला तिवारी के 16 वरिष्ठ डॉक्टर और बीडी पांडे जिला चिकित्सालय से कई वरिष्ठ डॉक्टरों का स्थानांतरण कर दिया है। जिसकी वजह से दोनों अस्पतालों के मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उनकी जगह किसी अन्य डॉक्टरों की नियुक्ति नही की गई। जबकि दोनों हॉस्पिटलों में रेफर के केस आते है। इसलिए उनके स्थानांतरण पर पुनः एक बार विचार किया जाए। स्थानांतरण होता भी है तो उनकी जगह स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की नियुक्ति की जाए। जिससे मरीजों को परेशानियों का सामना न करना पड़े। डॉक्टरों का स्थानांतरण वहां किया जा रहा है, जो हॉस्पिटल चालू नहीं है और जो हॉस्पिटल चालू है उनमें नियुक्ति नहीं की जा रही है।

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हिन्दुस्थान समाचार / लता