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प्रयागराज, 14 जुलाई (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति राजीव गुप्ता और न्यायमूर्ति हरवीर सिंह की खंडपीठ ने वाराणसी में सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (2004-05) के धन के कथित दुरुपयोग से जुड़े एक मामले में याची नवीन चंद की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है और विवेचना में देरी की विवेचना अधिकारी से सफाई मांगी है।
याची का कहना है कि उसे दुर्भावनापूर्ण उद्देश्य से झूठा फंसाया गया है और आज तक कोई विभागीय जांच पूरी नहीं हुई है। यह भी दलील दी गई कि एफआईआर 2019 में दर्ज हुई थी, याचिकाकर्ता जांच में सहयोग कर रहे हैं, इसलिए इतने विलंब से गिरफ्तारी की कोई आवश्यकता नहीं।
कोर्ट ने माना कि मामला विचारणीय है और वाराणसी सेक्टर (ई.ओ.डब्ल्यू) थाने में दर्ज केस आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 477-ए, 120बी, 34 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(2)) में अगली सुनवाई तक याचिकाकर्ता की गिरफ्तारी नहीं होगी।
कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए जांच अधिकारी को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह स्पष्ट करने का निर्देश दिया कि सात वर्षों से जांच पूरी क्यों नहीं हो पाई। साथ ही ई.ओ.डब्ल्यू के महानिदेशक (डीजी) को भी हलफनामा देकर यह बताना होगा कि 20 वर्षों से अधिक समय से जांच में निगरानी की कमी क्यों रही। इसके अतिरिक्त पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव को भी बताना होगा कि 20 साल बाद भी विभागीय जांच शुरू क्यों नहीं हुई।
अगली सुनवाई 17 अगस्त 2026 को नियत की गई है। राज्य सरकार को तीन सप्ताह में जवाबी हलफनामा दाखिल करने को कहा गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे