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-हिंदुत्व, सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण पर विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष की हिन्दुस्थान समाचार के साथ विस्तृत बातचीत
डॉ. मयंक चतुर्वेदी
विश्व हिंदू परिषद(विहिप) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता आलोक कुमार का मानना है कि हिंदुत्व धार्मिक पहचान होने के साथ सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक आत्मविश्वास और राष्ट्र निर्माण का व्यापक दर्शन है। दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र राजनीति से लेकर न्यायालयों में हिंदू हितों से जुड़े मामलों की पैरवी करने तक का लंबा अनुभव रखने वाले आलोक कुमार आज विहिप के शीर्ष नेतृत्व में हैं।
‘हिंदुस्थान समाचार’ को दिए गए विशेष साक्षात्कार में उन्होंने सामाजिक विषमताओं को समाप्त करने, हिंदू समाज के संगठन, धर्मांतरण, ‘लव जिहाद’, युवाओं की भूमिका, राम मंदिर, कृष्ण जन्मभूमि, काशी और भोजशाला जैसे मुद्दों पर खुलकर अपने विचार रखे। उन्होंने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता प्रकरण पर भी स्पष्ट संदेश दिया, “भगवान राम के नाम पर आने वाले एक-एक रुपये के प्रति ट्रस्ट जवाबदेह है और दोषी चाहे कितना प्रभावशाली क्यों न हो, उसे बख्शा नहीं जाएगा।”
विहिप की पहली प्राथमिकता, सामाजिक विषमता का अंत
आलोक कुमार ने कहा कि आज भी हिंदू समाज के सामने सबसे बड़ी चुनौती सामाजिक असमानता है। उनका कहना है कि सदियों तक समाज के कुछ वर्गों को गांवों के बाहर रहने, सम्मानजनक जीवन से वंचित रहने और सामाजिक भेदभाव झेलने के लिए विवश किया गया। ऐसे में विहिप की प्राथमिकता धार्मिक जागरण के अलावा सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और कौशलगत पिछड़ेपन को दूर करना है।
वे कहते हैं, “एक ऐसा विकसित और संस्कारित समाज तैयार करना आवश्यक है जो अपने आचरण से विश्व को मार्गदर्शन दे सके। उनके अनुसार हिंदुत्व का वास्तविक स्वरूप समरसता, आत्मसम्मान और समाज के अंतिम व्यक्ति के उत्थान से जुड़ा हुआ है।”
राम मंदिर आंदोलन से सामाजिक जागरण तक
विहिप के कार्यों और अपने नेतृत्व में संगठन की दिशा पर आलोक कुमार कहते हैं, “विहिप सदैव सामूहिक नेतृत्व वाला संगठन रहा है। 1964 में स्थापना के बाद संगठन ने समय-समय पर नए विषयों को अपनाया। 1984 में राम जन्मभूमि आंदोलन ने पूरे हिंदू समाज को एक सूत्र में जोड़ने का कार्य किया।”
उनके अनुसार अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हिन्दू समाज के लिए धार्मिक उपलब्धि से अधिक इस बात के लिए महत्व रखता है कि यह सदियों की उसकी सामूहिक चेतना, त्याग और संगठन शक्ति का प्रतीक है। हालांकि वे यह भी स्पष्ट करते हैं कि “मंदिर केवल भूमि पर ही नहीं, हिंदुओं के हृदय में भी बनना चाहिए।”
विहिप वर्तमान में जनजातीय और अनुसूचित समाज के बच्चों की शिक्षा, छात्रावास, वेद विद्यालय, संस्कृत संरक्षण, गौसंरक्षण और भारतीय ज्ञान परंपरा को पुनर्स्थापित करने जैसे अनेक प्रकल्पों पर कार्य कर रही है। उन्होंने विशेष रूप से बताया कि ओडिशा में जनजातीय छात्राओं के लिए संचालित वेद विद्यालय इस दिशा में एक अनूठा प्रयोग है।
युवा शक्ति : हिंदुत्व चेतना का नया आधार
देश के युवाओं की भूमिका पर आलोक कुमार बेहद आशावादी दिखाई देते हैं। उनका दावा है, “वर्तमान समय में बजरंग दल देश का सबसे बड़ा युवा संगठन है और विभिन्न सामाजिक परिस्थितियों में उसके कार्यकर्ता सबसे पहले सक्रिय दिखाई देते हैं।”
वे कहते हैं कि आज के युवाओं में हिंदुत्व के प्रति स्वाभाविक आकर्षण बढ़ रहा है। इसका उदाहरण वे महाकुंभ में युवाओं की बड़ी भागीदारी और नए वर्ष के अवसर पर मंदिरों में उमड़ी भीड़ को बताते हैं। उनके अनुसार भारतीय युवा पश्चिमी जीवनशैली की अंधी नकल से आगे बढ़कर अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है। उनका मानना है, “यह धार्मिक प्रवृत्ति वास्तव में भारतीय चेतना का पुनर्जागरण है, जोकि आने वाले समय में और अधिक मजबूत होगा।”
धर्मांतरण पर कड़ा रुख
देश में धर्मांतरण के मामलों पर विहिप अध्यक्ष का रुख स्पष्ट और कठोर है। वे कहते हैं, “भारत में होने वाले अधिकांश धर्मांतरण आध्यात्मिक परिवर्तन नहीं बल्कि लालच, भय या छल के माध्यम से किए जाते हैं।” महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा- “सेवा, शिक्षा या चिकित्सा के बदले धर्म परिवर्तन कराना धार्मिक कार्य नहीं बल्कि व्यापारिक मानसिकता है।” उन्होंने मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र सहित विभिन्न राज्यों के धर्मांतरण विरोधी कानूनों का समर्थन किया और उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता बताई।
‘लव जिहाद’ और सांस्कृतिक जागरूकता का प्रश्न
‘लव जिहाद’ के मुद्दे पर आलोक कुमार का स्पष्ट कहना रहा है कि “पहचान छिपाकर संबंध बनाना और बाद में धर्म का खुलासा करना गंभीर धोखा है।” उन्होंने नए आपराधिक कानूनों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे मामलों को अब अधिक गंभीरता से देखा जा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने हिंदू समाज को भी आत्ममंथन की सलाह दी। उनका कहना है कि “यदि बच्चों को अपने धर्म, संस्कृति और परंपराओं का ज्ञान परिवार में मिले तो वे भ्रमित नहीं होंगे।” उन्होंने दादा-दादी की कहानियों और पारिवारिक संस्कारों की परंपरा को पुनर्जीवित करने पर जोर दिया।
बदलता बॉलीवुड और हिंदुत्व का सांस्कृतिक प्रभाव
हाल के वर्षों में ‘रामायण’, ‘कश्मीर फाइल्स‘, ‘द केरल स्टोरी’ और ऐतिहासिक चरित्रों पर आधारित फिल्मों की बढ़ती लोकप्रियता को आलोक कुमार हिंदू समाज की बदलती मानसिकता से जोड़ते हैं। उनके अनुसार फिल्म उद्योग अंततः बाजार की मांग पर चलता है। यदि हिंदुत्व आधारित विषयों पर फिल्में बन रही हैं और सफल हो रही हैं, तो इसका अर्थ है कि समाज ऐसे विषयों को देखना चाहता है। वे कहते हैं, “जिन फिल्मों में हिंदू आस्था या परंपराओं का अपमान होता है, उन्हें दर्शक अस्वीकार कर देते हैं।” उनका मानना है कि “हिंदुत्व विषयक सिनेमा भारत के सांस्कृतिक मानस की अभिव्यक्ति बनकर उभर रहा है।”
राम मंदिर के बाद अगला लक्ष्य क्या?
राम मंदिर निर्माण को ऐतिहासिक उपलब्धि बताते हुए विहिप के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष का मानना है कि विश्व हिन्दू परिषद का अंतिम लक्ष्य सिर्फ मंदिर निर्माण तक सीमित होना कभी नहीं रहा है, बल्कि “रामराज्य की भावना” को समाज में स्थापित करना ही हमारे संगठन का मूल ध्येय है।उन्होंने कहा, “संयमित जीवन, समाज के लिए समय और संसाधनों का उपयोग तथा नैतिक मूल्यों पर आधारित जीवन ही रामराज्य की दिशा है।” साथ ही उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि कृष्ण जन्मभूमि, काशी से जुड़े मामलों में तथ्य और तर्क हिंदू पक्ष के साथ हैं, हाल ही में मध्य प्रदेश में धार स्थित भोजशाला में यह सिद्ध भी हो चुका है, ऐसे में आगे भी आने वाले वर्षों में सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं।
सरकार से अपेक्षाएं : मंदिरों पर हिंदू समाज का अधिकार
वर्तमान सरकार से अपेक्षाओं के प्रश्न पर उन्होंने कहा कि विहिप सरकारों को समय-समय पर अपने सुझाव देती रहती है। उनकी प्रमुख मांगों में मंदिरों के प्रशासन पर सरकारी नियंत्रण समाप्त करना शामिल है। उनका तर्क है कि “जिस प्रकार मस्जिदों और चर्चों का संचालन संबंधित समुदाय स्वयं करता है, उसी प्रकार हिंदू समाज को भी अपने मंदिरों के संचालन का अधिकार होना चाहिए।” इसके अतिरिक्त शिक्षा संस्थानों के संचालन में समान अधिकारों की भी उन्होंने वकालत की।
वैश्विक हिंदू समाज को जोड़ने की रणनीति
दुनिया भर में बसे हिंदुओं के संबंध में आलोक कुमार ने कहा कि विहिप उनके साथ सांस्कृतिक जुड़ाव तक सीमित न रहते हुए उनकी समस्याओं के समाधान में भी सक्रिय भूमिका निभा रही है। उन्होंने बताया, “बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के मुद्दे को लेकर 100 से अधिक देशों में जागरूकता अभियान चलाए गए और विभिन्न सरकारों तक संदेश पहुंचाया गया।” उनका मानना है कि इस प्रकार का अंतरराष्ट्रीय दबाव अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।
हम विभाजन नहीं, एकता की बात करते हैं
समाज में विभाजन बढ़ाने के आरोपों को खारिज करते हुए आलोक कुमार ने कहा कि “विश्व हिन्दू परिषद का उद्देश्य हिंदू समाज को संगठित करना और जातीय तथा सामाजिक दूरियों को समाप्त करना है। यदि कोई समाज अपने संगठन और आत्मबल को मजबूत करता है तो उससे दूसरों को भयभीत होने की आवश्यकता नहीं है।” उनके अनुसार विहिप का कार्य किसी के विरोध में नहीं, बल्कि अपने समाज को सशक्त बनाने के लिए है।
राम मंदिर प्रकरण पर स्पष्ट संदेश: दोषी कोई भी हो, बख्शा नहीं जाएगा
अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितता और चोरी के आरोपों पर आलोक कुमार ने दो टूक कहा कि “श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट” भगवान राम के नाम पर आने वाले प्रत्येक रुपये के प्रति जवाबदेह है। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट ने स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने का आग्रह किया था। जांच शुरू हो चुकी है और ट्रस्ट पूर्ण सहयोग कर रहा है।
उन्होंने कहा, “जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा, लेकिन यदि कोई भी व्यक्ति दोषी पाया जाता है तो उसकी सामाजिक या राजनीतिक हैसियत देखकर कोई रियायत नहीं दी जाएगी।” उनके अनुसार यह केवल वित्तीय अनियमितता का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास से जुड़ा विषय है। इसलिए सत्य सामने आना और दोषियों पर कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है।
आलोक कुमार के इस विस्तृत संवाद से स्पष्ट है कि विहिप आने वाले वर्षों में स्वयं को धार्मिक संगठन के रूप में देखने के साथ सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राष्ट्रीय चेतना के वाहक के रूप में स्थापित करने की दिशा में सतत कार्यरत है। राम मंदिर आंदोलन की सफलता के बाद संगठन का फोकस अब समाज के भीतर समता, संस्कार और संगठन की भावना को मजबूत करने पर है। वहीं धर्मांतरण, सांस्कृतिक पहचान, वैश्विक हिंदू एकता और राष्ट्रीय मुद्दों पर उसका रुख पहले की तरह मुखर और स्पष्ट है। उनके शब्दों में, “मंदिरों का निर्माण महत्वपूर्ण है, लेकिन उससे भी अधिक आवश्यक है कि हिंदू समाज के हृदय में रामराज्य की भावना स्थापित हो।”
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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी