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सूरत, 21 जून (हि.स.)। गुजरात के सूरत स्थित सरसाना कन्वेंशन सेंटर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय योग दिवस कार्यक्रम में प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला। शहर के पांडेसरा और वेसु क्षेत्र से आए दादा–पोते तथा दादा–पोती की जोड़ियों ने एक साथ योगाभ्यास कर सभी का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। यह दृश्य मानो इस कहावत को चरितार्थ कर रहा था कि “बचपन में मिले संस्कार जीवनभर साथ रहते हैं।”
पांडेसरा निवासी 65 वर्षीय राम यादव अपने 12 वर्षीय पोते अर्जुन के साथ विभिन्न योगासन करते नजर आए। अर्जुन ने बताया कि वह पढ़ाई के साथ नियमित रूप से प्राणायाम करता है और छुट्टी के दिनों में योगाभ्यास भी करता है। उसका कहना है कि योग से पढ़ाई में एकाग्रता बढ़ती है और खेलकूद में भी ऊर्जा बनी रहती है।
राम यादव पिछले 20 वर्षों से नियमित योग और ध्यान कर रहे हैं। वे प्रतिदिन 45 मिनट से एक घंटे तक योगाभ्यास करते हैं, जिसकी बदौलत आज भी स्वस्थ, सक्रिय और ऊर्जावान जीवन जी रहे हैं।
वहीं, वेसु निवासी 71 वर्षीय रसिकभाई पटेल अपनी 6 वर्षीय पोती तिलिका के साथ योग करते दिखाई दिए। दादा–पोती की यह जोड़ी उत्साह, अनुशासन और एकाग्रता का सुंदर उदाहरण बनी। छोटी उम्र में तिलिका का योग के प्रति समर्पण सभी के लिए प्रेरणादायक रहा। रसिकभाई प्रतिदिन 5 किलोमीटर पैदल चलते हैं और नियमित हल्का व्यायाम भी करते हैं। घरेलू और सामाजिक जिम्मेदारियों के साथ उनकी सक्रिय जीवनशैली नई पीढ़ी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
योग दिवस पर दादा–पोते और दादा–पोती की इन जोड़ियों ने यह संदेश दिया कि डिजिटल युग में भी यदि बच्चों को परिवार से सही मार्गदर्शन और संस्कार मिलें, तो वे स्वस्थ, अनुशासित और सफल जीवन की ओर अग्रसर हो सकते हैं। पुरानी और नई पीढ़ी का यह सुंदर समन्वय वास्तव में समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
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हिन्दुस्थान समाचार / यजुवेंद्र दुबे