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हैदराबाद, 30 अप्रैल (हि.स.)। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी पर फोन टैपिंग मामले में विपक्षी नेताओं को फंसाने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। बीआरएस ने इस मामले में निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित जांच की मांग की है।
गुरुवार को तेलंगाना भवन में मीडिया को संबोधित करते हुए बीआरएस के महासचिव आरएस प्रवीण कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार ने चार्जशीट में पूर्व मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव, केटी रामाराव और टी. हरीश राव सहित बीआरएस नेताओं के नाम शामिल करने के लिए दूसरी विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया है। इससे पहले एक पुलिस अधिकारी की शिकायत के आधार पर पंजागुट्टा पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था। उन्होंने कहा कि जांच अधूरी होने के बावजूद अधिकारियों पर इन नामों को शामिल करने के लिए दबाव डाला जा रहा है।
प्रवीण कुमार ने कहा कि पिछले दो वर्षों में 350 से अधिक गवाहों से पूछताछ की गई है, फिर भी अब तक कोई चार्जशीट दाखिल नहीं की गई है।
पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रवीण कुमार ने स्पष्ट किया कि फोन टैपिंग किसी भी सरकार के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के उद्देश्यों के लिए कानूनी रूप से की जाती है। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान मामले का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है।
प्रवीण कुमार ने इस मामले से जुड़े व्यक्तियों के साथ किए जा रहे व्यवहार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि पूर्व पुलिस अधिकारी प्रभाकर राव को हिरासत में कठोर परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि मिलीभगत और दबाव के जरिए बीआरएस नेताओं के खिलाफ बयान निकलवाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने एक व्यवसायी का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस पर कई मामले दर्ज हैं, उसे एक अन्य मामले में बीआरएस एमएलसी नवीन कुमार का नाम लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj