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हैदराबाद, 23 जून (हि.स.)। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) की ओर से शिक्षा से संबंधित मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी स्कूल बंद के आह्वान के बाद मंगलवार को तेलंगाना के कई हिस्सों में स्कूलों में कामकाज बाधित है। प्रदर्शनों की आशंका को देखते हुए कई निजी और कॉर्पोरेट स्कूलों ने विशेष रूप से हैदराबाद में पहले ही छुट्टी की घोषणा कर दी है।
एबीवीपी ने छात्रों, अभिभावकों और स्कूल प्रबंधन से इस बंद का समर्थन करने की अपील की है। संगठन का कहना है कि निजी और सरकारी दोनों तरह के स्कूलों को प्रभावित करने वाले लंबे समय से लंबित मुद्दों पर राज्य सरकार द्वारा तत्काल हस्तक्षेप की आवश्यकता है। एबीवीपी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बार-बार आवेदन देने के बावजूद शिक्षा संबंधी चिंताएं अनसुलझी हैं और उन्होंने तत्काल नीतिगत कार्रवाई की मांग की है।
इस विरोध प्रदर्शन के केंद्र में निजी और कॉर्पोरेट स्कूलों द्वारा ली जाने वाली फीस के सख्त नियमन की मांग है। एबीवीपी का आरोप है कि कई संस्थान बिना पर्याप्त निगरानी के फीस बढ़ाते हैं, जिससे परिवारों पर आर्थिक बोझ पड़ता है।
एबीवीपी की मांग है कि निजी स्कूलों की फीस को नियंत्रित करने और मनमानी बढ़ोतरी को रोकने के लिए एक कानून बनाया जाए। निजी स्कूलों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए 25 प्रतिशत आरक्षण को सही ढंग से लागू किया जाए। सरकार द्वारा जारी स्कूली यूनिफॉर्म का तत्काल वितरण हो, जो अभी तक कई छात्रों को नहीं मिला है। शिक्षण और गैर-शिक्षण के रिक्त पदों पर भर्ती, साथ ही मंडल शिक्षा अधिकारियों और जिला शिक्षा अधिकारियों की नियुक्ति की जाए। आवासीय गुरुकुल स्कूलों के लिए स्थायी भवनों और मिड-डे मील की बेहतर निगरानी सहित शैक्षणिक संस्थानों में बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित हो।
संगठन ने प्रवेश और शैक्षणिक प्रथाओं में अधिक पारदर्शिता की भी मांग की है और राज्य भर में फीस संशोधन और स्कूल निरीक्षण के लिए एक समर्पित प्राधिकरण बनाने की मांग की है। संगठन ने राज्य सरकार पर सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने के बजाय निजी और कॉर्पोरेट संस्थानों पर अधिक ध्यान केंद्रित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत स्कूली शिक्षा के प्रावधानों को लागू करने की भी मांग की है।
एबीवीपी के प्रदेश सचिव मचर्ला रामबाबू ने मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के नेतृत्व वाली सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकारी स्कूलों को पर्याप्त ध्यान नहीं मिल रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / Dev Kumar Pukhraj