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जयपुर, 06 मार्च (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने पैरोल प्रार्थना पत्रों को लापरवाही से खारिज करने से जुडे मामले में भरतपुर कलेक्टर और एसपी पर नाराजगी प्रकट की। अदालत ने कहा कि आप लोगों ने कोर्ट को क्या पोस्ट ऑफिस समझ रखा है। आपके इसी रवैये के चलते कोर्ट में पैरोल से जुडे प्रकरण लगातार बढ़ रहे हैं और हम जरूरी मामलों की सुनवाई नहीं कर पाते हैं। जस्टिस महेन्द्र गोयल व जस्टिस भुवन गोयल की खंडपीठ ने यह टिप्पणी शुक्रवार को अनिल कपूर उर्फ रिंकू की याचिका पर सुनवाई करते हुए की।
सुनवाई के दौरान अदालत आदेश की पालना में भरतपुर कलेक्टर व एसपी कोर्ट में हाजिर हुए। अदालत ने दोनों अफसरों को कहा कि वे इन मामलों में अपना मस्तिष्क काम में क्यों नहीं लेते हैं। मौजूदा मामले में याचिकाकर्ता कैदी 12 साल की सजा काट चुका हैं और वह पिछले 4 साल से ओपन जेल में हैं, लेकिन एक पुलिसकर्मी की रिपोर्ट पर आप लोगों ने भरोसा कर लिया। आपने अपना मस्तिष्क इस्तेमाल नहीं किया। यदि आप किसी चीज को लेकर आशंका जता रहे हैं तो उसके ठोस सबूत भी पेश करें। वहीं कलेक्टर की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता की 20 दिन की पैरोल मंजूर कर ली गई है। इसके साथ ही एसीएस गृह और डीजीपी की ओर से विधानसभा सत्र में व्यस्त होने का हवाला देते हुए उपस्थिति से छूट चाही। जिसे स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि कई बार दोनों अफसरों को इस व्यवस्था में सुधार के लिए कहा जा चुका है, लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ। ऐसे में वे 16 मार्च को पेश होकर इस लापरवाही पूर्ण रवैये पर अपना स्पष्टीकरण दें और साथ ही भविष्य में ऐसी लापरवाही से बचने के उपायों के बारे में भी बताए।
मामले से जुडे अधिवक्ता गोविंद प्रसाद रावत ने बताया कि याचिकाकर्ता कैदी का आचरण संतोषजनक है। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग भरतपुर के संयुक्त निदेशक ने भी रिपोर्ट में पैरोल देने की सिफारिश की थी, लेकिन भरतपुर एसपी की रिपोर्ट पर उसे पैरोल नहीं दी गई। जिस पर सुनवाई करते हुए अदालत ने चारों अफसरों को तलब करते हुए याचिकाकर्ता के पैरोल पर विचार करने को कहा था।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक