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जयपुर, 06 मार्च (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने हाईकोर्ट कर्मचारियों के ग्रेड पे के संबंध में साल 2019 में दिए अदालती आदेश की पालना के लिए राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय दिया है। पालना नहीं होने पर अदालत ने 12 मार्च को प्रमुख विधि सचिव और वित्त सचिव को व्यक्तिश: पेश होकर अपना जवाब देने को कहा है। जस्टिस सुदेश बंसल और जस्टिस आशुतोष कुमार की खंडपीठ ने यह आदेश राजेश कुमार जैन की अवमानना याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
सुनवाई के दौरान प्रमुख विधि सचिव राघवेंद्र काछवाल अदालत में पेश हुए, लेकिन वे अदालती आदेश की पालना नहीं करने का उचित कारण नहीं बता सके। वहीं वित्त विभाग की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता विज्ञान शाह ने आदेश की पालना के लिए समय मांगा। इस पर अदालत ने कहा कि हाईकोर्ट के 10 जनवरी 2019 को दिए आदेश को सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को कंफर्म किया है। इसके बाद राज्य सरकार को 10 फरवरी 2026 को पालना के लिए समय दिया, लेकिन अब बिना कोई दस्तावेज और बिना किसी कारण समय मांगा जा रहा है, जो गैर जरूरी लगता है। पहली नजर में यह दिखाता है कि अफसर हाईकोर्ट के आदेश की पालना के लिए पूरी ईमानदारी से तैयार नहीं हैं। इसके बावजूद उन्हें भरोसा है कि प्रमुख विधि सचिव व वित्त सचिव सहित अन्य संबंधित अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए कदम उठाएंगे, ताकि अवमानना से बचा जा सके। यदि ऐसा नहीं हुआ तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा। इसके साथ ही अदालत ने मामले की सुनवाई 12 मार्च को तय की है। गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने 10 जनवरी 2019 को राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि यदि हाईकोर्ट कर्मचारी के समकक्ष पद अधीनस्थ कोर्ट में अधिक वेतनमान पर है, तो हाईकोर्ट कर्मचारियों को उसके समान ही वेतन दिया जाना चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक