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नाहन, 05 फ़रवरी (हि.स.)। जिला सिरमौर के ट्रांसगिरि क्षेत्र की पारंपरिक और औषधीय गुणों से भरपूर हाटी सोंठ को भारत सरकार की पीपीवीएफआरए (प्रोटेक्शन ऑफ प्लांट वैराइटीज एंड फार्मर राइट अथॉरिटी) से पंजीकरण मिल गया है। इसके साथ ही अब हाटी सोंठ को जियोग्राफिकल इंडिकेशन (जीआई) टैग दिलाने की प्रक्रिया तेज हो गई है, जिसे किसानों के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इस पंजीकरण से हाटी सोंठ को राष्ट्रीय पहचान मिली है और आने वाले समय में किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिलने की उम्मीद भी बढ़ गई है।
एशिया भर में प्रसिद्ध जिला सिरमौर का अदरक कुछ समय तक बीमारी की मार झेलने के बाद अब फिर से बेहतर उत्पादन की ओर लौट रहा है। हाटी किसान संघ ने इस विशिष्ट सोंठ के पंजीकरण के लिए कई वर्षों तक लगातार प्रयास किए, जिसके तहत सोंठ के सैंपल दिल्ली और केरल की प्रयोगशालाओं में भेजे गए।
केंद्र सरकार के भारतीय मसाला अनुसंधान संस्थान कालीकट (केरल) से औषधीय गुणों से भरपूर हाटी सोंठ के सैंपल को मंजूरी मिलने के बाद इसे वर्ष 2025 के गजट में प्रकाशित किया गया। अब हाटी सोंठ की जीआई टैगिंग के लिए आवश्यक दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं। इस पूरी प्रक्रिया में हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर धौलाकुआं और हाटी किसान संघ के अध्यक्ष कुंदन सिंह शास्त्री की अहम भूमिका रही है।
ट्रांसगिरी क्षेत्र के बेला, बशवा, मोराड, मशवाड़, शरली, कांडो, चयोग, माशू और किलोड क्षेत्रों में तैयार अदरक से बड़ी मात्रा में हाटी सोंठ बनाई जाती है। जिला सिरमौर की सोंठ अपनी खास खुशबू और औषधीय गुणों के कारण देश भर की सोंठ से अलग पहचान रखती है। दिल्ली की सबसे बड़ी अदरक मंडी खारी बावली में बेला सोंठ की विशेष मांग रहती है, जहां से यह सोंठ अरब देशों तक निर्यात की जाती है। टौंस नदी के किनारे उगने वाला फाइबर जिंजर सोंठ उत्पादन के लिए खास माना जाता है।
हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर धौलाकुआं में 26 फरवरी को होने वाली वैज्ञानिक सलाहकार समिति की बैठक में हाटी किसान संघ को हाटी सोंठ के पंजीकरण का प्रमाण पत्र सौंपा जाएगा। यह प्रमाण पत्र हाल ही में केंद्र सरकार के मंत्रालय से कृषि विज्ञान केंद्र को प्राप्त हुआ है। कम्युनिटी बेस पर किए गए इस पंजीकरण के तहत केंद्र सरकार किसानों को बेहतर कृषि उत्पाद विकसित करने के लिए प्रोत्साहन राशि भी प्रदान करती है।
डॉ. पंकज मित्तल प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रभारी कृषि विज्ञान केंद्र सिरमौर धौलाकुआं ने बताया कि जिला सिरमौर के किसानों की पुरानी मांग हाटी सोंठ को पीपीवीएफआरए में पंजीकरण दिलाने की थी। हाटी किसान संघ की ओर से दिल्ली और केरल की प्रयोगशालाओं में भेजे गए सभी सैंपल पास होने के बाद ही यह पंजीकरण संभव हो सका है। अब जल्द ही हाटी सोंठ को जीआई टैग भी मिलेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / जितेंद्र ठाकुर