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प्रयागराज, 04 फ़रवरी (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मानव सेवा संघ बृंदावन के प्रबंधक गोपाल शरण, ओमवीर व सतीस सिंह के खिलाफ सिविल जज जूनियर डिवीजन मथुरा की अदालत में चल रहे आपराधिक केस कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
शिकायतकर्ता सुलेखा शर्मा को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में याचिका पर जवाब मांगा है।यह आदेश न्यायमूर्ति नंदप्रभा शुक्ला ने गोपाल शरण व दो अन्य की याचिका पर दिया है।
याचियों के खिलाफ न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में कम्प्लेंट दाखिल की गई जिसमें आरोप लगाया गया कि याचीगण ने विपक्षी को अपने निवास संत कुटी में जाने से जबरन रोका और षड्यंत्र कर मारा-पीटा और जान से मारने की धमकी दी। पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की तो अदालत में अर्जी दी।
याची अधिवक्ता का कहना था कि शिकायत कर्ता को अवैध रूप से आश्रम में घुसने से मना किया गया। कोई मारपीट नहीं की गई। चोट की कोई रिपोर्ट नहीं दाखिल है। एक झूठी कहानी बनाकर केस कायम किया गया है। कोर्ट ने मुद्दा विचारणीय माना।
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हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे