Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

- डॉ. मयंक चतुर्वेदी
वर्ष 2026 के आरंभ में भारत एक ऐसे निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुका है, जहाँ कृत्रिम बुद्धिमत्ता देश की तकनीकी दिशा तय करने वाला प्रमुख आधार बन रही है। यह परिवर्तन किसी एक नीति, संस्था या कंपनी का परिणाम नहीं है। यह भारत की सामूहिक बौद्धिक शक्ति, युवाओं की उद्यमशील सोच और एक स्पष्ट राष्ट्रीय दृष्टि का परिणाम है। जिस वैश्विक एआई प्रतिस्पर्धा में भारत कुछ वर्ष पहले तक दर्शक की भूमिका में माना जाता था, उसी मंच पर आज वह अग्रणी दावेदार के रूप में उभर रहा है।
वस्तुत: स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी रिपोर्ट में भारत का सातवें स्थान से सीधे तीसरे स्थान पर पहुँचना इस बदलाव का ठोस प्रमाण है। अमेरिका और चीन के बाद भारत का नाम आना यह दर्शाता है कि भारतीय प्रतिभा, स्टार्टअप संस्कृति और तकनीकी सोच अब वैश्विक स्तर पर गंभीरता से ली जा रही है।
वैश्विक परिदृश्य में भारत की पहचान
आज हम इस सत्य को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन के पास विशाल संसाधन और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर है। इसके बावजूद भारत ने अपनी अलग पहचान बनाई है। भारतीय एआई इकोसिस्टम की खासियत उसकी समस्या-समाधान आधारित सोच और बड़े पैमाने पर लागू करने की क्षमता है। स्टार्टअप फंडिंग में भारत का वैश्विक टॉप-5 में आना और एआई पब्लिकेशंस में लगातार बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि भारत ज्ञान और नवाचार दोनों में आगे बढ़ रहा है। देखा जाए तो एक तरह से Microsoft, Google, Amazon और Accel जैसी वैश्विक कंपनियों का भारतीय एआई स्टार्टअप्स में निवेश इस भरोसे को दर्शाता है कि आने वाले वर्षों में भारत एआई के क्षेत्र में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
स्टार्टअप्स से सशक्त होता भारत
आज भारत में 150 से अधिक जेनरेटिव एआई स्टार्टअप्स सक्रिय हैं। इन स्टार्टअप्स ने वर्ष 2020 के बाद से 1.5 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश आकर्षित किया है। यह आँकड़ा एक स्थायी तकनीकी बदलाव की ओर इशारा करता है। भारत के एआई स्टार्टअप्स शिक्षा, स्वास्थ्य, भाषा, कृषि, ई-कॉमर्स, गेमिंग, मीडिया और औद्योगिक विश्लेषण जैसे क्षेत्रों में गहराई से काम कर रहे हैं।
Sarvam AI भारतीय भाषाओं के लिए बड़े भाषा मॉडल विकसित कर रहा है, जिससे एआई तकनीक आम नागरिक की पहुँच में आ सके। Gnani.ai और Soket AI वॉयस टेक्नोलॉजी के माध्यम से डिजिटल सेवाओं को सरल और स्वाभाविक बना रहे हैं। Avataar.ai और Gan AI जनरेटिव एआई के ज़रिये डिजिटल कंटेंट और वर्चुअल अनुभवों को नए आयाम दे रहे हैं। Krutrim का भारत का पहला एआई यूनिकॉर्न बनना यह स्पष्ट करता है कि भारतीय एआई नवाचार अब वैश्विक व्यावसायिक मानकों पर खरा उतर रहा है।
सरकारी सहयोग से मजबूत होता इकोसिस्टम
भारतीय एआई यात्रा की एक बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ सरकार और स्टार्टअप्स के बीच सहयोग की स्पष्ट भावना दिखाई देती है। IndiaAI मिशन इसी सहयोग का परिणाम है। पाँच सौ से अधिक प्रस्तावों में से बारह स्टार्टअप्स को फाउंडेशन मॉडल्स के लिए चुना जाना यह दर्शाता है कि भारत अपनी एआई क्षमताओं को स्वयं विकसित करना चाहता है। जिसमें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जनवरी 2026 में आयोजित गोलमेज बैठक ने इस सोच को और मजबूती दी। इस बैठक में शामिल एआई स्टार्टअप्स ने अपने अनुभव साझा किए और भारत में उपलब्ध अनुकूल वातावरण की सराहना की। प्रधानमंत्री का यह कहना कि “स्टार्टअप्स भारत के भविष्य के सह-निर्माता हैं।” देश के हर युवा इनोवेटर के लिए प्रेरणा का संदेश है।
यहां प्रधानमंत्री मोदी द्वारा नैतिकता, पारदर्शिता, निष्पक्षता और डेटा गोपनीयता पर दिया गया जोर यह स्पष्ट करता है कि भारत तकनीक को केवल प्रगति का साधन नहीं, बल्कि विश्वास का माध्यम भी मानता है। किफायती और समावेशी एआई की दिशा में भारत की पहल दुनिया के लिए एक वैकल्पिक और मानवीय मॉडल प्रस्तुत करती है।
भारतीय संदर्भ में विकसित होती एआई
भारत की एआई रणनीति की सबसे बड़ी ताकत उसका स्थानीय दृष्टिकोण है। भारतीय भाषाओं, सांस्कृतिक संदर्भों और सामाजिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर विकसित किए जा रहे एआई मॉडल देश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बना रहे हैं। BharatGen जैसे प्रयास यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि भारतीय डेटा और भाषाओं पर आधारित मॉडल भारत की अपनी जरूरतों को पूरा करें।
भारतीय एआई स्टार्टअप्स की कहानी तकनीक से कहीं आगे की कहानी है। यह कहानी आत्मनिर्भर भारत, युवा भारत और नवाचारी भारत की कहानी है। यह उन उद्यमियों की कहानी है जो भारतीय संदर्भ में वैश्विक समाधान गढ़ रहे हैं। यह उस राष्ट्र की कहानी है जो भविष्य की तकनीक को अपनाने से पहले उसे समझता है और फिर अपने मूल्यों के साथ आगे बढ़ाता है। वस्तुत: आज जब भारत एआई की बात करता है, तब वह सिर्फ एल्गोरिदम और डेटा की चर्चा नहीं करता। वह समाज, समावेशन और विश्वास की बात करता है। यही सोच भारत को आने वाले समय में एक वैश्विक एआई शक्ति के रूप में स्थापित करेगी और यही सोच हर भारतीय को गर्व से भरने का कारण बनेगी। आज के दिन हमें यही आशा करनी चाहिए।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. मयंक चतुर्वेदी