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- उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश- जिम्मेदार कंपनियों से 17-17 लाख का मुआवजा दो माह में वसूलें
नई दिल्ली, 08 जनवरी (हि.स.)। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने 2023 में वाराणसी में गंगा किनारे बनाया गया टेंट सिटी पर्यावरण नियमों का उल्लंघन है। एनजीटी चेयरपर्सन प्रकाश श्रीवास्तव ने उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्देश दिया कि वो वाराणसी में गंगा किनारे टेंट सिटी बसाने के लिए जिम्मेदार कंपनियों से 17-17 लाख का मुआवजा दो महीने में वसूल करे।
याचिका सौरभ तिवारी ने दायर किया था। याचिका में वाराणसी में टेंट सिटी के निर्माण में पर्यावरण नियमों के उल्लंघन की शिकायत की गई थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए एनजीटी ने मार्च 2023 में शिकायत की पड़ताल करने सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया था। कमेटी ने विभिन्न पर्यावरणीय उल्लंघनों को सही पाया जिसके बाद यूपी प्रदूषण नियंत्रण कमेटी ने टेंट सिटी का निर्माण करने वाले दो उपक्रमों पर नवंबर 2023 में 17-17 लाख रुपये का मुआवजा लगाने का आदेश दिया।
दरअसल वाराणसी विकास प्राधिकरण ने मेसर्स प्रवेग कम्युनिकेशंस इंडिया लिमिटेड और मेसर्स निरान द टेंट सिटी के साथ शहर के विकास के लिए एक समझौता किया था। इस समझौते के तहत वाराणसी के चेट घाट के सामने टेंट सिटी स्थापित की गई थी। सुनवाई के दौरान वाराणसी विकास प्राधिकरण ने कहा कि टेंट सिटी 15 जनवरी से 31 मई तक चलाया गया था। जब ये मामला एनजीटी में आया उसके बाद राज्य सरकार ने टेंट सिटी के प्रोजेक्ट को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।
याचिका में कहा गया था कि इस टेंट सिटी की वजह से गंगा प्रदूषण हो रही है और इससे प्रकृति को काफी नुकसान हो रहा है। याचिका में कहा गया था कि टेंट सिटी बिना पर्यावरणीय अनुमति के ही स्थापित की गई थी।
हिन्दुस्थान समाचार /संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / प्रभात मिश्रा