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सहरसा, 05 जनवरी (हि.स.)। नवहट्टा अंचल क्षेत्र के खरका तेलवा मैदान में सोमवार को मासिक एक दिवसीय शिव गुरु महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें कहा गया कि भगवान शिव की शिष्यता ग्रहण करने से मानव के मानवीय गुण उजागर होता है और दानवीय गुणों का क्षय।
महोत्सव को सम्बोधित करते हुए शिव के शिष्य भाई परमेश्वर ने कहा कि बंधन एवं मोक्ष का कारण मन ही है,मन को शिव गुरु के चरणों में लगाए रहना ही मुक्तिदायी है।मुक्ति के लिए कहा गया है कि लेते ज्ञनान न: मुक्तै: अर्थात ज्ञान के बिना मुक्ति संभव नहीं।उन्होंने कहा कि शिव गुरु के चरणों में मन लगाए रखने से ज्ञान स्वत:अर्न्तआत्मा में प्रगट हो जाता हैं और प्राणी सारे भव बंधनों से अर्थात जगत प्रपंच से मुक्त होकर परमानंद के अस्तित्व में स्थिर हो जाता।
उन्होंने कहा कि साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी ने शिव को गुरु मानकर जनमानस के बीच 3 सुत्र के माध्यम से शिव गुरु सत्ता से अवगत कराया जिससे आध्यात्मिक यात्रा सरल और सुलभ हुआ। उन्होंने कहा कि भगवान शिव को जगत गुरु, आदि गुरु कहा गया,लेकिन इस बात से संसार के लोगों को अवगत नही कराया गया।उन्होंने कहा कि लेकिन ऋषि मुनि,साधकों ने शिव को शिष्य भाव अर्पित कर आज देवत्व को प्राप्त किया जिसका उदाहरण संत शिरोमणि बाबा कारु,और संत शिरोमणि लक्ष्मीनाथ गोसाई हम लोगों के जीवन में परिणाम दायी साबित हो रहें हैं।
उन्होंने कहा कि इसी कड़ी के महामानव साहब श्री हरीन्द्रानन्द जी ने शिव से प्राप्त अनुभुति के आधार पर जनमानस से आह्वान किया कि शिव सचमुच के गुरु हैं,जिन्हें शिष्य भाव अर्पित करते रहने पर लौकिक पारलौकिक मनोरथ स्वत: सिद्ध होगा, उन्होंने भी अजमाया आप भी आजमा कर जांच सकते हैं।उन्होंने कहा कि शिव के शिष्यता की सुगंध आज भारत बर्ष में लोगों को शिव अनुष्ठान के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
शिव शिष्य हरीन्द्रानन्द फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम को गुरु भाई डोमी राम,महेन्द्र कामत, शैलेन्द्र कुमार, जटेश्वर राय,रामविलास साह,वेतन रजक, शशि यादव, गुलशन राय,अभेली राम,गुरु बहन किरण, आरती,बीणा,महरानी,रतन,राधा,सोनी,जीवछी,रामविलास जी,दिनेश जी,गिरवर जी,बाला जी, संतोष जी आदि ने कहा कि वर्तमान कालखंड में भगवान शिव और उनकी शिष्यता आध्यात्मिक यात्रा में फलदायी साबित हो रहा है।
हिन्दुस्थान समाचार / अजय कुमार