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कोलकाता, 29 जनवरी (हि.स.)। नकद के बदले स्कूल नौकरी घोटाले में ‘अयोग्य’ पाए गए उम्मीदवारों से वेतन वसूली के सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के लगभग एक साल बाद अब पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग (डब्ल्यूबीएसएससी) ने वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
सूत्रों के अनुसार, आयोग ने जिला-वार अयोग्य उम्मीदवारों की सूची पहले ही संबंधित जिला मजिस्ट्रेटों को भेज दी है। इसके बाद जिला स्कूल निरीक्षक (डीआई) अब संबंधित उम्मीदवारों को नोटिस जारी कर उनसे वेतन की वापसी की प्रक्रिया शुरू करेंगे। नोटिस में यह स्पष्ट किया जाएगा कि प्रत्येक उम्मीदवार को कितनी राशि लौटानी होगी।
वसूली की जाने वाली राशि में सेवा अवधि के दौरान प्राप्त वेतन की मूल राशि के साथ-साथ उस पर देय ब्याज भी शामिल होगा। इस संबंध में पहले वर्ष 2024 में कलकत्ता हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने निर्देश दिया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट की डिवीजन बेंच ने भी बरकरार रखा।
बताया गया है कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली राज्य सरकार ने वसूली प्रक्रिया शुरू करने में काफी देरी की थी। इस देरी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई थी और राज्य सरकार के वकील से स्पष्टीकरण भी मांगा था।
सुप्रीम कोर्ट ने अयोग्य उम्मीदवारों द्वारा प्राप्त वेतन की मूल राशि पर 12 प्रतिशत ब्याज की दर तय की है।
राज्य शिक्षा विभाग के सूत्रों के मुताबिक, यह वसूली बंगाल पब्लिक डिमांड्स रिकवरी एक्ट, 1913 के प्रावधानों के तहत की जाएगी। यदि कोई अयोग्य उम्मीदवार भुगतान करने से इनकार करता है या असमर्थता जताता है, तो उसके नाम पर पंजीकृत संपत्ति को जब्त कर नीलामी के माध्यम से राशि की वसूली की जा सकती है।
सूत्रों ने यह भी बताया कि सेवा अवधि और वेतनमान के आधार पर औसतन प्रत्येक अयोग्य उम्मीदवार को 20 लाख से 25 लाख रुपये तक की राशि चुकानी पड़ सकती है।
हिन्दुस्थान समाचार / अभिमन्यु गुप्ता