रांची एयरपोर्ट के पास जमीन विवाद में हाई कोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से मांगा जवाब
- विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश, निर्माण के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी रांची, 14 अगस्त (हि.स.)। रांची एयरपोर्ट के पास स्थित एक खाली जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहे विवाद पर झारखंड उच्च न्यायालय ने रक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है। न्य
फाइल फोटो उच्च न्यायालय


- विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश, निर्माण के लिए कोर्ट की अनुमति जरूरी

रांची, 14 अगस्त (हि.स.)। रांची एयरपोर्ट के पास स्थित एक खाली जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहे विवाद पर झारखंड उच्च न्यायालय ने रक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने मंत्रालय से पूछा कि उक्त जमीन पर उसका दावा किस आधार पर बनता है। अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि यदि जमीन पर दावे से संबंधित कोई अधिसूचना या अन्य दस्तावेज रक्षा मंत्रालय के पास है तो उसे अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया जाए।

सुनवाई के दौरान अदालत ने विवादित जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। साथ ही स्पष्ट किया कि यदि सेना उक्त जमीन पर किसी तरह का निर्माण करना चाहती है तो उसे इसके लिए पहले उच्च न्यायालय से अनुमति लेनी होगी। प्रार्थी की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।

मामले में नीलिमा प्रसाद ने उच्च न्यायालय में रिट याचिका दाखिल की है। उनकी ओर से अदालत को बताया गया कि रांची एयरपोर्ट के निकट स्थित खाली जमीन उनकी निजी संपत्ति है। याचिकाकर्ता के अनुसार, जमीन का सेल डीड उनके पास है और उसका म्यूटेशन भी हो चुका है। इसके अलावा जमीन की अद्यतन रेंट रसीद भी उनके नाम से जारी है।

याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इन दस्तावेजों के बावजूद सेना ने उक्त जमीन पर अपना दावा करते हुए वहां सेना की जमीन होने का बोर्ड लगा दिया है। उनका आरोप है कि उन्हें अपनी जमीन पर जाने से भी अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है।

याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि यदि उक्त जमीन पर सेना या रक्षा मंत्रालय का कोई अधिकार है तो उसके समर्थन में संबंधित अधिसूचना या वैध दस्तावेज मौजूद होना चाहिए। उन्होंने रक्षा मंत्रालय से ऐसे दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश देने का आग्रह किया।

याचिकाकर्ता ने यह भी कहा कि यदि सेना को जमीन की आवश्यकता है और उस पर निर्माण करना चाहती है, तो नियमानुसार जमीन का अधिग्रहण किया जाए और इसके एवज में उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।

अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान रक्षा मंत्रालय से जमीन पर उसके दावे का आधार स्पष्ट करने को कहा है। फिलहाल विवादित जमीन पर यथास्थिति बनी रहेगी और सेना को वहां किसी भी तरह का निर्माण करने से पहले अदालत की अनुमति लेनी होगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / विकाश कुमार पांडे