डीजी जेल और पैरोल समिति के सदस्यों के खिलाफ क्यों ना अवमानना की कार्रवाई करें, एसीएस गृह भी आकर दे जवाब-हाईकोर्ट
जयपुर, 14 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद कैदी को स्थायी पैरोल का लाभ नहीं देने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने डीजी जेल और राज्य स्तरीय पैरोल सलाहकार समिति के सदस्यों को 18 अगस्त को पेश होकर बताने को कहा है कि क्
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जयपुर, 14 अगस्त (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने अदालती आदेश के बावजूद कैदी को स्थायी पैरोल का लाभ नहीं देने पर नाराजगी जताई है। इसके साथ ही अदालत ने डीजी जेल और राज्य स्तरीय पैरोल सलाहकार समिति के सदस्यों को 18 अगस्त को पेश होकर बताने को कहा है कि क्यों ना उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई अमल में लाई जाए। वहीं अदालत ने एसीएस गृह को हाजिर होकर बताने को कहा है कि राज्य सरकार के 1 मई 2024 का आदेश किस तरह विधि सम्मत है। अदालत ने एसीएस गृह से यह भी पूछा है कि याचिकाकर्ता को गत 22 जुलाई से 4 अगस्त को एएजी के मौखिक निर्देश देने तक स्थायी पैरोल पर रिहा क्यों नहीं किया है। अदालत ने कहा है कि क्यों न इसमें लिए जिम्मेदार अफसरों पर हर्जाना लगाकर उसे याचिकाकर्ता को दिलाया जाए। जस्टिस महेन्द्र गोयल और जस्टिस प्रमिल कुमार माथुर की खंडपीठ ने यह आदेश सुनील की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए। अदालत ने कहा कि कोर्ट के स्पष्ट निर्देश के बावजूद राज्य स्तरीय पैरोल समिति ने मामले पर इस तरह पुन: विचार किया, जैसे वह कोर्ट के निर्देशों के ऊपर हो सकती है, जबकि अदालत ने प्रकरण पर पुन: विचार करने का कोई विवेकाधिकार नहीं छोड़ा था। यह प्रथम दृष्ट्या अवमानना प्रकट करता है।

याचिका में अधिवक्ता बीआर चौधरी ने कहा कि हाईकोर्ट ने गत 3 जुलाई को पैरोल सलाहकार समिति की कार्रवाई को निरस्त कर जिला मजिस्ट्रेट को जमानत लेकर याचिकाकर्ता को स्थायी पैरोल पर रिहा करने को कहा था। इस आदेश के तहत झुंझुनूं जिला मजिस्ट्रेट ने 22 जुलाई को दौसा जेल अधीक्षक को मामला भेजकर याचिकाकर्ता को रिहा करने को कहा था। इसके बावजूद जेल अधीक्षक ने सरकार के 1 मई, 2024 के आदेश का हवाला देते हुए प्रकरण पुन: तैयार कर डीजी जेल के पास भेज दिया। वहीं राज्य स्तरीय पैरोल कमेटी ने 16 जुलाई को बैठक कर प्रकरण पर विचार किया और स्थायी पैरोल पर रिहा करने की सिफारिश की। याचिकाकर्ता ने कहा कि कोर्ट ने याचिकाकर्ता को स्पष्ट रूप से रिहा करने को कहा था, लेकिन उसे कोर्ट के दखल के बाद 4 अगस्त को रिहा किया गया। वहीं एएजी की ओर से कहा गया कि समस्या गृह विभाग के 1 मई के आदेश के कारण पैदा हुई, लेकिन भविष्य में कोर्ट के निर्देशों की तुरंत पालना की जाएगी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने एसीएस, डीजे जेल और समिति सदस्यों को तलब किया है।

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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक