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नई दिल्ली, 14 जुलाई (हि.स.)। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को वकीलों के सोशल मीडिया प्रचार पर रोक की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी राज्य बार काउंसिल को नोटिस जारी किया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने नोटिस जारी करने का आदेश दिया।
याचिका अनिल पांडेय ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि वकील सोशल मीडिया और दूसरे साधनों से अपना प्रचार करते हैं। ऐसा करना एडवोकेट एक्ट का उल्लंघन है। एडवोकेट एक्ट के मुताबिक कोई वकील मुवक्किलों को प्रभावित करने के लिए अपने काम का प्रचार नहीं कर सकता है। याचिका में कहा गया है कि एडवोकेट एक्ट में साफ प्रावधान होने के बावजूद वकील अपने काम का प्रचार करने के लिए प्रमोशनल रील और वीडियो बनाते हैं। वकील लीगल कंटेंट से पैसे कमाते हैं। वकील इंस्टाग्राम, यूट्यूब, फेसबुक और इसी तरह के डिजिटल प्लेटफार्म का खूब उपयोग कर रहे हैं।
वकीलों की ओर से अपलोड किए गए वीडियो में नाम, पता, विशेषज्ञता और मुवक्किलों के बयान तक होते हैं। यहां तक कि आपराधिक कार्यवाही को नाटकीय तरीके से दिखाया जाता है। जमानत के मामलों में सनसनी पैदा करने की कोशिश की जाती है, ताकि उनसे मुवक्किल जुड़ सकें। ऐसा करना बार काउंसिल ऑफ इंडिया रुल्स के नियम 36 का घोर उल्लंघन है।
हिन्दुस्थान समाचार/संजय
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हिन्दुस्थान समाचार / वीरेन्द्र सिंह