बेटे के इलाज के लिए गैंगस्टर काला को आठ सप्ताह की पैरोल
चंडीगढ़, 14 जुलाई (हि.स.)। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने हत्या, अपहरण और अन्य मामलों में सजा काट रहे गैंगस्टर रंदीप सिंह उर्फ काला को बेटे के इलाज के लिए आठ सप्ताह की पैरोल देने का आदेश जारी किया है। मामला हरियाणा के अंबाला जिला से संबंधित है। जस्
बेटे के इलाज के लिए गैंगस्टर काला को आठ सप्ताह की पैरोल


चंडीगढ़, 14 जुलाई (हि.स.)। पंजाब-हरियाणा उच्च न्यायालय ने हत्या, अपहरण और अन्य मामलों में सजा काट रहे गैंगस्टर रंदीप सिंह उर्फ काला को बेटे के इलाज के लिए आठ सप्ताह की पैरोल देने का आदेश जारी किया है। मामला हरियाणा के अंबाला जिला से संबंधित है। जस्टिस संजय वशिष्ठ ने यह आदेश काला की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया है।

अदालत ने कहा कि बच्चे की गंभीर चिकित्सीय स्थिति को देखते हुए केवल तकनीकी आधार पर पैरोल से इनकार करना उचित नहीं होगा। साथ ही कोर्ट ने हरियाणा सरकार को निर्देश दिया कि संबंधित उपायुक्त के माध्यम से कैदी और उसके परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन कर रिपोर्ट एक सप्ताह में अदालत के समक्ष प्रस्तुत की जाए, ताकि यह पता लगाया जा सके कि बच्चे के विशेष अस्पताल में इलाज का खर्च उठाने की उनकी क्षमता है या नहीं।

याचिकाकर्ता ने हरियाणा गुड कंडक्ट प्रिजनर्स (टेम्परेरी रिलीज) एक्ट, 2022 के तहत तीन सप्ताह की पैरोल मांगी थी। उसका कहना था कि उसका तीन वर्ष पांच माह का बेटा हिमांशु स्पाइना बिफिडा (रीढ़ से जुड़ी न्यूरोलॉजिकल बीमारी) से पीड़ित है और रोहतक के सनफ्लैग ग्लोबल अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों ने बच्चे की सर्जरी की सलाह दी है, लेकिन जेल में होने के कारण वह बेटे की देखभाल और उपचार में सहयोग नहीं कर पा रहा है।

राज्य सरकार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कुल 17 आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं। इनमें चार मामलों में उसे दोषी ठहराया गया, जबकि कई मामलों में वह बरी या डिस्चार्ज हो चुका है और तीन मामले अभी विचाराधीन हैं। सरकार ने बच्चे की बीमारी, इलाज और प्रस्तावित सर्जरी की भी पुष्टि की।

कोर्ट ने मेडिकल रिकॉर्ड और बच्चे की तस्वीरों का अवलोकन करने के बाद कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि बच्चा अत्यंत गंभीर स्थिति में है और उसे तत्काल चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता है। यदि पैरोल से इनकार किया गया तो इससे मासूम बच्चे के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है और उसे जिम्मेदार अभिभावक की देखभाल भी नहीं मिल पाएगी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि पैरोल का उद्देश्य केवल अस्थायी रिहाई नहीं, बल्कि सुधार और मानवीय दृष्टिकोण भी है इसलिए मामले की समग्र परिस्थितियों को देखते हुए तीन सप्ताह के बजाय आठ सप्ताह की पैरोल देना उचित होगा। मामले के एक अन्य पहलू पर सुनवाई के लिए कोर्ट ने 17 जुलाई 2026 की तिथि निर्धारित की है, जिस दिन परिवार की आर्थिक स्थिति संबंधी रिपोर्ट भी पेश की जाएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / संजीव शर्मा