Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

जयपुर, 14 जुलाई (हि.स.)। राजस्थान हाईकोर्ट ने कहा है कि दिवंगत सरकारी कर्मचारी की ओर से कानूनी रूप से गोद लिया गया बेटा भी अनुकंपा नियुक्ति पाने का अधिकारी है। इसके साथ ही अदालत ने बिना किसी ठोस कारण याचिकाकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति दावे को अस्वीकार करने को गलत मानते हुए पुलिस विभाग पर एक लाख रुपए का हर्जाना लगाया है। अदालत ने हर्जाना राशि साठ दिन में याचिकाकर्ता को अदा करने को कहा है। वहीं अदालत ने राज्य सरकार को कहा है कि वह याचिकाकर्ता के अनुकंपा नियुक्ति दावे पर पुन: विचार करे और यदि वह सभी जरूरी शर्तें पूरी करे तो उसे नियुक्ति दी जाए।
जस्टिस गणेश राम मीणा की एकलपीठ ने यह आदेश अश्विनी गुर्जर की ओर से दायर याचिका को मंजूर करते हुए दिए। याचिका से जुडे अधिवक्ता अक्षय यादव ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता के पिता पुलिस विभाग में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे। सेवा के दौरान उनकी 27 जनवरी, 2022 को मृत्यु हो गई। याचिकाकर्ता मृत सरकारी कर्मचारी का विधिक रूप से गोद लिया हुआ बेटा है। उसने पिता की जगह अनुकम्पा नियुक्ति के लिए आवेदन किया, लेकिन डीजीपी ऑफिस ने 2 मार्च 2023 को बिना कोई कारण बताए ही उसका दावा अस्वीकार कर दिया। इसे हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए कहा कि 1996 के नियमों के प्रावधानों के अनुसार, विधिक रूप से गोद लिया हुआ बेटा भी अनुकंपा नियुक्ति का अधिकारी है। ऐसे में वह नियमों में जरूरी शर्तों की पूर्ति करता है। उसे अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / पारीक