छग :आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूल में 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान हुई सामूहिक नकल के मामले में उच्च न्यायालय ने स्कूल शिक्षा सचिव से मांगा जवाब
बिलासपुर/रायपुर, 14 जुलाई (हि.स.)। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने महासमुंद जिले के भंवरपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूल में 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान हुई सामूहिक नकल के मामले में आज स्वतः संज्ञान लेते हुए स्कूल शिक्षा सचिव स
बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय


बिलासपुर/रायपुर, 14 जुलाई (हि.स.)। बिलासपुर स्थित छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने महासमुंद जिले के भंवरपुर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट स्कूल में 12वीं बोर्ड परीक्षा के दौरान हुई सामूहिक नकल के मामले में आज स्वतः संज्ञान लेते हुए स्कूल शिक्षा सचिव से जवाब मांगा है।मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस गंभीर लापरवाही पर सख्त नाराजगी जताई है।

उच्च न्यायालय ने स्कूल शिक्षा सचिव से सीधे तौर पर पूछा है कि परीक्षा हॉल के भीतर सामूहिक नकल कराने में संलिप्त और दोषी पाए गए शिक्षकों पर अब तक क्या दंडात्मक कार्रवाई की गई है।अदालत ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच को तीन महीने के भीतर पूरा करने का कड़ा निर्देश दिया है। डिवीजन बेंच ने छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा सचिव को नोटिस जारी कर इस पूरे प्रकरण पर शपथ पत्र के साथ जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई के लिए डिवीजन बेंच ने अक्टूबर के पहले की तिथि तय कर दी है।

मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने मीडिया रिपोर्ट और छात्रा की स्टिंग को देखते हुए मामले को स्वतः संज्ञान लेकर जनहित याचिका के रूप में आज सुनवाई की।

ज्ञात हो कि छत्तीसगढ़ महासमुंद जिले के बसना ब्लॉक के रोहिणी गांव की छात्रा नीता जगत, सरस्वती शिशु मंदिर की छात्रा है, उसका परीक्षा केंद्र स्वामी आत्मानंद स्कूल, भंवरपुर में था। परीक्षा के दौरान जब उसने देखा कि शिक्षक स्वयं छात्रों को उत्तर लिखवा रहे हैं और मोबाइल का खुलेआम उपयोग हो रहा है, तो उसने चुप रहने के बजाय सबूत जुटाने का निर्णय लिया। नीता ने स्टिंग ऑपरेशन के जरिए पूरी गड़बड़ी को मोबाइल में रिकॉर्ड कर लिया। छात्रा का सवाल था कि अगर इस तरह नकल होगी, तो ईमानदारी से पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट क्या करेंगे ।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, जब नीता ने सामुहिक नकल का विरोध किया, तो केंद्राध्यक्ष और स्कूल के प्रिंसिपल ने उसे सुरक्षा देने के बजाय फटकार लगाई। उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया और यहां तक कि अंग्रेजी की परीक्षा के दौरान उसकी डेस्क पर पहले से लिखकर कागज रख कर चिटिंग के झूठे केस में फंसाने की साजिश भी रची गई। इस भारी दबाव के कारण छात्रा बीमार पड़ गई, लेकिन उसने हार नहीं मानी। जिला स्तर पर सुनवाई नहीं होने पर उसने रायपुर स्थित माध्यमिक शिक्षा मंडल (माशिमं) के कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

उच्च न्यायालय ने इस मामले में मुख्य सचिव, छत्तीसगढ़ शासन, सचिव, स्कूल शिक्षा विभाग,सचिव, छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, कलेक्टर, महासमुंद, जिला शिक्षा अधिकारी, महासमुंद, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी, बसना व प्रिंसिपल, स्वामी आत्मानंद स्कूल, भंवरपुर को पक्षकार बनाने के निर्देश दिया है।

छात्रा और स्थानीय अभिभावकों की मांग है कि परीक्षा की गोपनीयता और पवित्रता भंग करने वाले शिक्षकों को केवल निलंबित न किया जाए, बल्कि उन्हें सेवा से बर्खास्त किया जाए। छात्रा ने परीक्षा केंद्रों पर कड़े सुरक्षा इंतजामों और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है ताकि ईमानदार छात्रों का नुकसान न हो।

हिन्दुस्थान समाचार / केशव केदारनाथ शर्मा