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मीरजापुर, 05 जून (हि.स.)। हलिया क्षेत्र स्थित प्रसिद्ध गड़बड़ा शीतला धाम में चल रहे शतचंडी महायज्ञ एवं श्रीराम कथा के तीसरे दिन शुक्रवार को भगवान श्रीराम जन्म प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। राम जन्म की कथा सुनकर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए और पूरा परिसर जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा।
कथा व्यास एवं यज्ञाचार्य धीरज द्विवेदी ने भगवान राम के अवतार के विभिन्न कारणों का विस्तार से वर्णन करते हुए कहा कि रावण के अत्याचारों से धरती व्याकुल हो उठी थी। देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने मर्यादा पुरुषोत्तम राम के रूप में अवतार लिया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मा जी के वरदान के कारण रावण का वध केवल मनुष्य और वानर के हाथों ही संभव था, इसलिए भगवान ने मानव रूप धारण किया।
उन्होंने कहा कि अयोध्या के राजा दशरथ संतानहीन थे। महर्षि वशिष्ठ की सलाह पर ऋष्यशृंग मुनि द्वारा पुत्रेष्टि यज्ञ कराया गया, जिसके प्रसाद के प्रभाव से भगवान श्रीराम सहित चारों भाइयों का अवतार हुआ। कथा में भगवान राम के जन्म का वर्णन करते हुए बताया गया कि चैत्र शुक्ल नवमी, पुनर्वसु नक्षत्र और कर्क लग्न में प्रभु श्रीराम का जन्म हुआ था।
यज्ञाचार्य ने कहा कि रामायण धैर्य, त्याग, यज्ञ, दान और सत्कर्म का संदेश देती है। राजा दशरथ ने लंबे समय तक धैर्य रखा, जिसके बाद उन्हें पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई। कथा के दौरान श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भगवान राम के जयकारे लगाते रहे।
इस अवसर पर पूर्व प्रधान शिव गरुड़ तिवारी, पूर्व प्रधान कृष्णा दुबे, पूर्व मंडल अध्यक्ष ज्ञानेश्वर दुबे, रवि शंकर तिवारी, दिनेश तिवारी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गिरजा शंकर मिश्रा