रुहेलखंड विश्वविद्यालय एवं सम्बद्ध महाविद्यालय अपनी कार्ययोजना तैयार कर शासन को करें प्रेषित : राज्यपाल
लखनऊ, 21 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से सम्बद्ध शासकीय, संघटक एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों की समीक
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से सम्बद्ध महाविद्यालयों के समीक्षा बैठक एवं प्रस्तुतीकरण सम्पन्न हुआ


लखनऊ, 21 मई (हि.स.)। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली से सम्बद्ध शासकीय, संघटक एवं वित्तपोषित महाविद्यालयों के प्रधानाचार्यों की समीक्षा बैठक एवं प्रस्तुतीकरण सम्पन्न हुआ।

राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालय एवं सम्बद्ध महाविद्यालय अपनी कार्ययोजना तैयार कर विभाग एवं शासन को प्रेषित करें, जिससे योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन महाविद्यालयों में छात्रावास रिक्त हैं, वहां स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से छात्राओं हेतु कौशल विकास कार्यक्रम संचालित किए जाएं। छात्राओं को रोजगारपरक शिक्षा एवं कौशल प्रशिक्षण प्रदान किया जाए, जिससे उन्हें रोजगार प्राप्त हो सके और वे आत्मनिर्भर बन सकें। उन्होंने छात्राओं के सर्वांगीण विकास हेतु विभिन्न रचनात्मक एवं विकासपरक गतिविधियां संचालित करने तथा रोजगारोन्मुखी व्यवसायिक पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में उसी व्यक्ति को रोजगार मिलेगा जिसके पास कौशल होगा, इसलिए छात्राओं को भविष्य की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जाए।

राज्यपाल ने फीडबैक व्यवस्था को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए, ताकि शिक्षण एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सके। उन्होंने शोध एवं अकादमिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से पांडुलिपियों का पंजीकरण सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी में कराने को कहा। साथ ही विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को उत्तर प्रदेश प्रमाणीकरण प्रणाली पर अपना पंजीकरण कर अद्यतन जानकारी रखने के निर्देश दिए, ताकि संस्थानों की शैक्षिक एवं प्रशासनिक गुणवत्ता का प्रभावी मूल्यांकन एवं प्रमाणीकरण सुनिश्चित हो सके।

राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद की तैयारी के लिए राज्यपाल ने सभी को प्रेरित करते हुए कहा कि महाविद्यालयों के लिए “नैक मंथन” का आयोजन किया जाए तथा संस्थानों को इस प्रकार तैयार किया जाए कि उन्हें ‘ए’ से ऊपर की श्रेणी प्राप्त हो। राज्यपाल ने संयुक्त शोध कार्यों को बढ़ावा देने के निर्देश देते हुए कहा कि प्रत्येक शिक्षक प्रतिवर्ष न्यूनतम दो शोध पत्र उच्च प्रभाव कारक वाली शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित करें, ताकि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों में शोध की गुणवत्ता, नवाचार एवं शैक्षणिक उत्कृष्टता को बढ़ावा मिल सके।

उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को “इनफ्लिबनेट” तथा “वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन” योजना से जोड़ने के निर्देश भी दिए, जिससे शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध सामग्री, ई-पत्रिकाओं, पुस्तकों एवं डिजिटल अध्ययन संसाधनों की सहज उपलब्धता हो सके तथा शोध एवं अध्ययन की गुणवत्ता में वृद्धि हो।

राज्यपाल ने कहा कि जिन महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक है, वहां कुलपति स्वयं निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करें कि विद्यार्थी नियमित रूप से कक्षाओं में उपस्थित हों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण करें। उन्होंने कहा कि केवल उपाधि प्राप्त करने के उद्देश्य से नामांकन कर घर पर बैठना उचित नहीं है। विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है, जिससे वे इधर-उधर भटकने के बजाय अपने भविष्य के प्रति सजग बनें।

राज्यपाल ने कहा कि सभी शिक्षक समय से महाविद्यालय पहुंचें, नियमित रूप से व्याख्यान लें तथा विद्यार्थियों को भी समय से महाविद्यालय आने और मन लगाकर अध्ययन करने के लिए प्रेरित करें। उन्होंने विभाग के अधिकारियों, मंत्री एवं कुलपतियों को सभी महाविद्यालयों का भ्रमण कर प्रतिवेदन तैयार करने के निर्देश भी दिए, ताकि व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।

साथ ही महाविद्यालयों में विद्यार्थियों को आकर्षित करने के लिए बी.ए. बी.एड.पाठ्यक्रम प्रारम्भ करने पर बल दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मियावाकी वन विकसित करने एवं वृक्षारोपण अभियान चलाने के निर्देश दिए।

राज्यपाल ने निर्देश दिया कि दीक्षांत समारोह के उपरांत “मां-बेटी सम्मेलन” आयोजित किए जाएं, जिनमें माताओं एवं बेटियों को सामाजिक विषयों एवं सामाजिक कुरीतियों के प्रति जागरूक किया जाए। उन्होंने कहा कि बेटियां अपनी माताओं से सबसे अधिक जुड़ी होती हैं, इसलिए उन्हें संस्कारयुक्त शिक्षा प्रदान की जाए, जिससे वे असामाजिक तत्वों एवं नकारात्मक प्रवृत्तियों से सजग रह सकें। उन्होंने सभी छात्राओं का रक्त परीक्षण कराने तथा उन्हें पोषण संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए, ताकि छात्राओं के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।

राज्यपाल ने “बाल विवाह बंद करो” एवं “दहेज प्रथा बंद करो” अभियान प्रारम्भ करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि कोई बालिका 18 वर्ष की आयु के बाद विवाह के कारण अपनी पढ़ाई बीच में छोड़ रही है तो उसके परिवार को जागरूक कर यह सुनिश्चित किया जाए कि उसकी शिक्षा बाधित न हो और वह अपनी पढ़ाई पूर्ण करे। उन्होंने विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को इन सभी कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान करने के निर्देश दिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. जितेन्‍द्र पाण्डेय