बीमा कंपनी की लापरवाही पर उपभोक्ता आयोग सख्त, पीड़ित को 2.50 लाख रुपये देने का आदेश
धर्मशाला, 06 मार्च (हि.स.)। जिला उपभोक्ता आयोग कांगड़ा ने बीमा दावा खारिज करने के मामले में यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को 2,50,672 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के
बीमा कंपनी की लापरवाही पर उपभोक्ता आयोग सख्त, पीड़ित को 2.50 लाख रुपये देने का आदेश


धर्मशाला, 06 मार्च (हि.स.)। जिला उपभोक्ता आयोग कांगड़ा ने बीमा दावा खारिज करने के मामले में यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को पीड़ित को मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को शिकायतकर्ता को 2,50,672 रुपये 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ अदा करने होंगे। इसके साथ ही 15 हजार रुपये मानसिक पीड़ा के लिए और 10 हजार रुपये मुकदमे के खर्च के रूप में देने के आदेश दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अंकुश काउंडल निवासी जरोट, तहसील जवाली, जिला कांगड़ा की मारुति सुजुकी सेलेरियो गाड़ी यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी में 12 मार्च 2022 से 11 मार्च 2025 तक बीमित थी। 4 नवंबर 2023 को शिकायतकर्ता के पिता संतोष कुमार जब गाड़ी को श्रीगंगानगर (राजस्थान) से हिमाचल प्रदेश की ओर चला रहे थे, तब रास्ते में वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो गया और रेलवे के एक ढांचे से टकरा गया। इस घटना को लेकर रेलवे पुलिस ने मामला दर्ज किया था और बाद में रेलवे न्यायालय बीकानेर ने चालक पर 4,500 रुपये का जुर्माना लगाया। दुर्घटना के बाद वाहन को 7 दिसंबर 2023 को वर्कशॉप में ले जाया गया, जहां सर्वे के बाद 2,50,672 रुपये का नुकसान आंका गया। इसके बावजूद बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर दिया, जिसके बाद अंकुश कौंडल ने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज करवाई।

मामले की सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने दावा किया कि दुर्घटना तेज रफ्तार के कारण हुई और शिकायतकर्ता ने दुर्घटना का कारण गलत बताया है। हालांकि उपभोक्ता आयोग ने रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच के बाद पाया कि दुर्घटना वास्तव में हुई थी और शिकायतकर्ता ने कोई महत्वपूर्ण तथ्य नहीं छिपाया।

आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर की पीठ ने माना कि बीमा कंपनी द्वारा दावा खारिज करना मनमाना और सेवा में कमी का मामला है। इसके चलते आयोग ने शिकायत को स्वीकार करते हुए बीमा कंपनी को निर्धारित राशि भुगतान करने का आदेश दिया।

हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया