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- नवाचार, निवेश और रोजगार सृजन को मिलेगा नया आयाम
भोपाल, 09 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश शासन द्वारा लागू की गई मध्यप्रदेश स्टार्टअप नीति 2025 राज्य में नवाचार, उद्यमिता एवं रोजगार सृजन को गति देने की दिशा में एक सशक्त और दूरदर्शी पहल है। यह नीति स्टार्टअप्स की संपूर्ण यात्रा विचार से लेकर विस्तार तक में उन्हें वित्तीय प्रोत्साहन, परिचालन सहयोग तथा आधारभूत संरचना से जुड़े व्यापक लाभ प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इसका लक्ष्य मध्य प्रदेश को देश के प्रमुख उभरते स्टार्टअप हब के रूप में स्थापित करना है।
राजधानी भोपाल में 11-12 जनवरी 2026 को आयोजित स्टार्टअप समिट के संदर्भ में यह नीति राज्य के स्टार्टअप इकोसिस्टम की मजबूती को रेखांकित करती है। नीति के अंतर्गत पात्र स्टार्टअप्स को मान्यता प्राप्त इनक्यूबेशन तंत्र के माध्यम से 30 लाख रुपये तक का सीड फंड उपलब्ध कराया जाएगा।
जनसंपर्क अधिकारी राजेश बैन ने शुक्रवार को बताया कि विकास पूंजी तक प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के लिए राज्य शासन द्वारा 100 करोड़ रुपये का स्टार्टअप वेंचर कैपिटल फंड स्थापित किया गया है। इस फंड के माध्यम से DPIIT-मान्यता प्राप्त स्टार्टअप्स में वैकल्पिक निवेश कोष (एआईएफ) के जरिए निवेश किया जाएगा, जिससे नवाचार आधारित उद्यमों को आवश्यक पूंजी समर्थन मिल सके।
स्टार्टअप्स को निवेश अथवा ऋण सहायता के रूप में 15 प्रतिशत तक (अधिकतम 15 लाख रुपये) की सहायता दी जाएगी, जबकि महिला-स्वामित्व वाले स्टार्टअप्स के लिए यह सहायता 18 प्रतिशत तक (अधिकतम 18 लाख रुपये) निर्धारित की गई है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री उद्यम क्रांति योजना के अंतर्गत स्टार्टअप्स को पांच वर्षों तक क्रेडिट गारंटी शुल्क की प्रतिपूर्ति तथा बैंक ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान का लाभ भी मिलेगा।
नीति में परिचालन एवं नवाचार सहयोग पर विशेष बल दिया गया है। इसके अंतर्गत स्टार्टअप्स को 12 माह तक 10,000 रुपये प्रतिमाह इनक्यूबेशन प्रोत्साहन, उत्पाद एवं प्रोटोटाइप विकास हेतु 15 लाख रुपये तक की पूर्ण प्रतिपूर्ति, तथा पेटेंट सहायता के रूप में राष्ट्रीय पेटेंट हेतु 5 लाख रुपये और अंतरराष्ट्रीय पेटेंट हेतु 20 लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी।
अन्य प्रमुख लाभों में लीज रेंटल की 50 प्रतिशत प्रतिपूर्ति (अधिकतम 10,000 रुपये प्रतिमाह, तीन वर्षों तक), ऑनलाइन विज्ञापन व्यय की 3 लाख रुपये तक प्रतिपूर्ति, तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में सहभागिता हेतु वित्तीय सहायता शामिल है।
रोजगार-प्रधान विनिर्माण स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए नीति में विशेष प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान किया गया है। इसमें प्रशिक्षण लागत की प्रतिपूर्ति, रोजगार सृजन प्रोत्साहन, तथा तीन वर्षों तक विद्युत शुल्क में छूट एवं टैरिफ प्रतिपूर्ति शामिल है, जिससे औद्योगिक विकास के साथ-साथ सतत रोजगार अवसरों का सृजन सुनिश्चित हो सके।
मध्यप्रदेश स्टार्टअप नीति 2025 राज्य सरकार की उस दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत एक सशक्त, समावेशी और भविष्योन्मुखी स्टार्टअप इकोसिस्टम का निर्माण किया जा रहा है—जहां नवाचार को बढ़ावा, वित्त तक सरल पहुंच और स्टार्टअप्स के विस्तार एवं सफलता के लिए अनुकूल वातावरण सुनिश्चित किया जा सके।
स्टार्टअप समिट 2026 में सहभागिता की अपील, लाभ लेने का आग्रह
आयुक्त एमएसएमई दिलीप कुमार ने स्टार्टअप्स, नवोन्मेषकों, उद्यमियों, निवेशकों, इनक्यूबेटर्स तथा स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़े सभी भागीदारों से राज्य सरकार द्वारा आयोजित की जा रही आगामी स्टार्टअप इकोसिस्टम पहलों एवं आयोजनों में सक्रिय सहभागिता के लिए आग्रह किया है।
आयुक्त कुमार ने कहा कि स्टार्टअप्स नवाचार-आधारित विकास, रोजगार सृजन एवं मूल्य निर्माण की रीढ़ हैं। उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों और विकास के विभिन्न चरणों में कार्यरत संस्थापकों से आगे आकर राज्य के तेजी से विकसित हो रहे स्टार्टअप इकोसिस्टम से जुड़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा है कि मध्य प्रदेश एक जीवंत, समावेशी एवं भविष्य-उन्मुख स्टार्टअप इकोसिस्टम के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है। राज्य एवं देशभर के स्टार्टअप्स से अपेक्षा की गई है कि वे सक्रिय रूप से सहभागिता करें, अपने नवाचारों का प्रदर्शन करें, उद्योग एवं सरकार के साथ सहयोग करें तथा मध्य प्रदेश में उपलब्ध नीतिगत एवं संस्थागत सहयोग का लाभ उठाएं।”
मध्य प्रदेश स्टार्टअप नीति 2025 के विज़न के अनुरूप स्टार्टअप्स को सीड फंडिंग, वेंचर कैपिटल तक पहुंच, इनक्यूबेशन सहायता, पेटेंट सहयोग, बाजार तक पहुंच तथा रोजगार से जुड़े प्रोत्साहनों सहित व्यापक सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। ये प्रोत्साहन प्रौद्योगिकी, विनिर्माण, सेवाएं, एग्रीबिजनेस, हरित ऊर्जा, हेल्थटेक, एडटेक एवं अन्य उभरते क्षेत्रों के स्टार्टअप्स के लिए उपलब्ध हैं।
राज्य सरकारका प्रमुख आयोजनों, स्टार्टअप समिट्स, प्रदर्शनियों, निवेशक संवाद, मेंटरिंग सत्रों एवं नीति-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से स्टार्टअप्स को पूंजी, बाजार, मेंटर्स, कॉरपोरेट्स एवं वैश्विक अवसरों से जोड़ने का लक्ष्य है, ताकि जमीनी स्तर पर नवाचार को प्रोत्साहन मिल सके।
हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत