धारः बसंत पंचमी पर अखंड पूजन के लिए राजपूत व रैदास समाज ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
धार, 09 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार जिले में शुक्रवार को राजपूत समाज एवं रैदास समाज द्वारा बसंत पंचमी पर अखंड पूजा अर्चना हेतु धार कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें कहा गया कि धार नगर में दिनांक 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को बसंत पंचमी पर मा
Rajput Samaj gyapan


Ravidas Samaj gyapan


धार, 09 जनवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के धार जिले में शुक्रवार को राजपूत समाज एवं रैदास समाज द्वारा बसंत पंचमी पर अखंड पूजा अर्चना हेतु धार कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें कहा गया कि धार नगर में दिनांक 23 जनवरी 2026 (शुक्रवार) को बसंत पंचमी पर माँ सरस्वती जन्मोत्सव को निर्विघ्न संम्पन्न करवाई जावे।

ज्ञापन में कहा गया कि धार नगर मे राजा भोज की धारनगरी में माँ सरस्वती की उपासना के लिये एक विशाल भवन शारदा सदन, सरस्वती कण्ठाभारण का निर्माण राजा भोज ने अपनी देखरेख में करवाया था, जो आज भोजशाला के नाम से विश्व विख्यात है। सन् 1034 में चालीस दिवसीय सरस्वती जन्मोत्सव के साथ ही मों सरस्वती (वाग्देवी) की स्फटिक से निर्मित सुंदरव सौम्य मुद्रा वाली प्रतिमा बनवाकर उसकी प्राणप्रतिष्ठा की। तब से इस भोजशाला में मॉ सरस्वती की साधना व आराधना सतत चलती रही है। सन् 1904 में भोजशाला की गौरवशाली, एतिहासिक एंव धार्मिक पृष्ठभूमि के कारण तत्कालिक अग्रेंज शासन ने इसे राष्ट्र की सरंक्षित धरोहर माना। सन् 1952 में इसे भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने संरक्षित इमारत घोषित किया है।

यह कि हिन्दु समाज के संघर्ष व भावनाओ को देखते हुए केन्द्रीय पुरातत्व विभाग दिल्ली के द्वारा 7 अप्रैल 2003 को आदेशा पारित कर हिन्दुओ के लिये प्रति मंगलवार एवं बंसता पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक पुरे दिन के लिए पूजा अर्चना हेतु हिन्दुओ को अधिकार प्रदाना किये गये। उक्त आदेश की मूल भावना का आधार हिन्दु समाज की भावना एंव परम्परा के अनुसार तिथि का धार्मिक महत्व है। उसी को आधार मानते हुए बंसत पंचमी के दिन सूर्योदय से सूर्यास्त तक पुरे दिन के लिये पूजा अर्चना का अधिकार प्रदान किया गया है।

दिनांक 7 अप्रैल 2003 के आदेश की मूल भावना का पालन शासन, प्रशासन के द्वारा वर्ष 2006, 2013 व 2016 में नही करवाने की स्थिति में हिन्दु समाज अपमानित व प्रताड़ित हुआ है। साथ ही स्थानीय प्रशासन के द्वारा आदेश की मूल भावना का पालन नहीं करवाने पर पू क्षेत्र की कानून व्यवस्था बिगड़ी है और जन धन की क्षति हुई है।

सम्पूर्ण हिन्दु समाज बसंत पंचमी को निर्बाध पुरे दिन पुजा, आराधना, यज्ञ, हवन करने हेतु दृढ संकल्पित है।सम्पूर्ण हिन्दु समाज की ओर से इस ज्ञापन के द्वारा जो मांग की जा रही है, उस अनुसार आदेश दिनांक 07.04.2003 की मुल भावना जिसमे बसंत पंचमी की तिथि के दिन सम्पूर्ण हिन्दु समाज को सूर्योदय से सूर्यास्त तक पुजा अर्चना का अधिकार देता है, उस पुजा के अधिकार का शासन के माध्यम से पालन करवाया जान सुनिश्चित हो, माँ की अखण्ड पुजा हो ऐसी मांग करता है। उक्त व्यवस्था निर्मित होने पर धार की शांती एवं सुरक्षा बनी रहेगी और हिन्दु समाज की धार्मिक मान्यता पुरी होगी और किसी अन्य धार्मिक परम्परा की हानि नहीं होगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / Gyanendra Tripathi