पर्यावरणविद प्रो. माधव का निधन, कूटा ने व्यक्त किया शोक
नैनीताल, 08 जनवरी (हि.स.)। पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रख्यात पर्यावरणविद प्रो. माधव गाडगिल का 83 वर्ष की आयु में पुणे में निधन हो गया। उनके निधन पर कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ-कूटा ने गहरा शोक
स्वर्गीय प्रो. माधव गाडगिल।


नैनीताल, 08 जनवरी (हि.स.)। पारिस्थितिकी और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले प्रख्यात पर्यावरणविद प्रो. माधव गाडगिल का 83 वर्ष की आयु में पुणे में निधन हो गया।

उनके निधन पर कुमाऊं विश्वविद्यालय शिक्षक संघ-कूटा ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की है। कूटा के अध्यक्ष प्रो. ललित तिवारी ने कहा कि प्रो. गाडगिल का योगदान पर्यावरण संरक्षण, पारिस्थितिकी अध्ययन और सामुदायिक आधारित संसाधन प्रबंधन में अत्यंत महत्वपूर्ण रहा, विशेष रूप से पश्चिमी घाट क्षेत्र के लिए। उन्होंने भारतीय विज्ञान संस्थान में पारिस्थितिकी विज्ञान केंद्र की स्थापना की, नीलगिरि बायोस्फीयर रिजर्व के गठन में अहम भूमिका निभाई तथा गाडगिल समिति की रिपोर्ट के माध्यम से पश्चिमी घाट को पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र घोषित करने और खनन पर प्रतिबंध की सिफारिश की।

उन्हें पद्म श्री, पद्म भूषण और वर्ष 2024 में संयुक्त राष्ट्र का चैंपियंस ऑफ द अर्थ पुरस्कार प्रदान किया गया था। कूटा की ओर से डॉ. नीलू लोधियाल, डॉ. दीपक कुमार, डॉ. युगल जोशी, डॉ. संतोष कुमार, डॉ. कुबेर गिनती, डॉ. शिवांगी, डॉ. दीपिका गोस्वामी, डॉ.अनिल बिष्ट, डॉ.अशोक कुमार, डॉ. रितेश साह, एलुमनी सेल के अध्यक्ष डॉ. बीएस कालाकोटी, डॉ.एसएस सामंत, डॉ.जीसी जोशी, ज्योति कांडपाल और डॉ. मीना पांडे ने भी प्रो. गाडगिल के निधन को पर्यावरण जगत के लिए अपूरणीय क्षति बताते हुए शोक व्यक्त किया है।

हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी