नेक्स्ट जेनरेशन गैल्वनाइज़्ड एवं कलर कोटेड स्टील्स पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ शुभारंभ
पूर्वी सिंहभूम, 08 जनवरी (हि.स.)। नेक्स्ट जेनरेशन गैल्वनाइज़्ड एवं कलर कोटेड स्टील्स (गाल्वानेक्स्ट-2026) विषय पर आधारित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन गुरुवार को होटल विवांता, जमशेदपुर में किया गया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न
अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन


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पूर्वी सिंहभूम, 08 जनवरी (हि.स.)।

नेक्स्ट जेनरेशन गैल्वनाइज़्ड एवं कलर कोटेड स्टील्स (गाल्वानेक्स्ट-2026) विषय पर आधारित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्घाटन गुरुवार को होटल विवांता, जमशेदपुर में किया गया। इस प्रतिष्ठित सम्मेलन में भारत सहित विभिन्न देशों से आए 70 से अधिक संस्थानों का प्रतिनिधित्व करने वाले 300 से अधिक प्रतिनिधि, विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता, नीति-निर्माता एवं उद्योग जगत के वरिष्ठ पेशेवरों ने भाग लिया।

उद्घाटन सत्र में डॉ. संदीप घोष चौधरी, निदेशक, सीएसआईआर–नेशनल मेटलर्जिकल लैबोरेटरी मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे, जबकि एल. पुगलेंथी, कार्यकारी निदेशक, इंडिया लेड एंड जिंक डेवलपमेंट एसोसिएशन एवं पूर्व अध्यक्ष, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

मंच पर डॉ. अतनु रंजन पाल, मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी, टाटा स्टील एवं अध्यक्ष, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स–जमशेदपुर चैप्टर; प्रवीन वेंकटेशन थम्पी, प्रबंध निदेशक, टाटा ब्लूस्कोप एवं अध्यक्ष, गाल्वानेक्स्ट-2026; तथा डॉ. गोपी किशोर मंडल, मुख्य वैज्ञानिक, सीएसआईआर-एनएमएल एवं उपाध्यक्ष, गाल्वानेक्स्ट-2026 मौजूद थे।

सम्मेलन के अध्यक्ष प्रवीन वी. थम्पी ने अपने संबोधन में उन्नत गैल्वनाइजिंग प्रक्रियाओं, धात्विक एवं कार्बनिक कोटिंग्स, संक्षारण संरक्षण, डिजिटलाइजेशन, हरित प्रौद्योगिकियों और भविष्य के लिए तैयार सामग्रियों पर ज्ञान-विनिमय की आवश्यकता पर बल दिया। डॉ. अतनु रंजन पाल ने गाल्वानेक्स्ट-2026 को उद्योग, शिक्षा और अनुसंधान संस्थानों के बीच सहयोग का सशक्त मंच बताया तथा स्वदेशी तकनीकों के विकास पर जोर दिया।

मुख्य अतिथि डॉ. संदीप घोष चौधरी ने कहा कि अगली पीढ़ी की गैल्वनाइजिंग और कलर-कोटिंग तकनीकें अवसंरचना विकास, उत्पादों की दीर्घायु और डीकार्बनाइजेशन लक्ष्यों को प्राप्त करने में अहम भूमिका निभाएंगी।

वहीं विशिष्ट अतिथि एल. पुगलेंथी ने सम्मेलन को अनुसंधान और औद्योगिक अनुप्रयोगों के बीच सेतु बताते हुए जिंक उत्पादन में भारत की आत्मनिर्भरता की सराहना की।

सम्मेलन के पहले दिन डॉ. फ्रैंक ई. गुडविन (इंटरनेशनल जिंक एसोसिएशन) और डॉ. शुभ गौतम (अमेरिकन प्रीकोट ग्रुप) के प्लेनरी व्याख्यान, पैनल चर्चा एवं तकनीकी सत्रों के माध्यम से गैल्वनाइज्ड एवं कलर-कोटेड स्टील्स से जुड़ी नवीन तकनीकों, चुनौतियों और भविष्य की आवश्यकताओं पर व्यापक मंथन किया गया।

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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक