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बीजापुर, 08 जनवरी (हि.स.)। बस्तर में धर्मांतरण को लेकर गुरुवार को सर्व आदिवासी समाज ने पत्रकारवार्ता की, जिसमें पदाधिकारियों ने छत्तीसगढ़ में पेशा कानून, पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र, ग्राम सभा के अधिकार और धर्मांतरण को लेकर अपनी मांगों को रखा। सर्व आदिवासी समाज ने कहा कि अगर किसी गांव में किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है और वह व्यक्ति धर्मांतरण कर चुका हो, तो उसके कफन-दफन का कार्यक्रम आदिवासी परंपरा के खिलाफ है। यह समाज का अपमान है और ऐसे मामलों में कफन-दफन कार्यक्रम पर रोक लगाने की पहल समाज द्वारा की जा रही है । सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष अरविंद नेताम ने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी परंपरा, संस्कृति और आस्था है । धर्मांतरण के जरिए इन परंपराओं को तोड़ने का प्रयास बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश कार्यकारिणी अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक राजाराम तोडम ने कहा कि पेशा कानून और ग्राम सभा के अधिकार सर्वोपरि हैं । गांव के फैसले गांव में होंगे, धर्मांतरण के बाद की गतिविधियों को ग्राम सभा स्वीकार नहीं करेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राकेश पांडे