आईवीआरआई ओडिशा के लिए बनेगा नॉलेज पार्टनर, पशुधन क्षेत्र में सहयोग की होगी पहल
आईवीआरआई ओडिशा के लिए बनेगा नॉलेज पार्टनर, पशुधन क्षेत्र में सहयोग की होगी पहल
आईवीआरआई, इज्जतनगर में आयोजित इंटरफेस बैठक में ओडिशा के प्रमुख सचिव श्री सुरेश कुमार वशिष्ठ (आईएएस) और निदेशक, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाएं, श्री विजय अमृता कुलांगे आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के साथ बैठक के दौरान विचार-विमर्श करते हुए।


आईवीआरआई, इज्जतनगर में आयोजित इंटरफेस बैठक में ओडिशा के प्रमुख सचिव श्री सुरेश कुमार वशिष्ठ (आईएएस) और निदेशक, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाएं, श्री विजय अमृता कुलांगे आईवीआरआई निदेशक डॉ. त्रिवेणी दत्त के साथ बैठक के दौरान विचार-विमर्श करते हुए।


बरेली, 7 जनवरी (हि.स.) । भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई), इज्जतनगर ने ओडिशा राज्य के पशु चिकित्सा अधिकारियों के साथ “पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन में नवीन प्रगति” विषय पर एक दिवसीय इंटरफेस बैठक का आयोजन किया। कार्यक्रम हाइब्रिड मोड में आयोजित हुआ, जिसमें ओडिशा के विभिन्न जिलों से 502 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया।

मुख्य अतिथि सुरेश कुमार वशिष्ठ, प्रमुख सचिव, मत्स्य एवं पशुपालन संसाधन विकास (ARD) विभाग, ओडिशा सरकार ने कहा कि आईवीआरआई की वैज्ञानिक विशेषज्ञता और अनुसंधान क्षमताएँ ओडिशा के पशुधन क्षेत्र के समग्र विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। उन्होंने संस्थान को ओडिशा के लिए नॉलेज पार्टनर बनने का प्रस्ताव दिया, जिससे न केवल पशुधन उत्पादन और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार होगा, बल्कि रोजगार और किसानों की आय में भी वृद्धि सुनिश्चित की जा सकेगी।

विशिष्ट अतिथि विजय अमृता कुलांगे, निदेशक, पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवाएं, ओडिशा सरकार ने कहा कि डेयरी, पोल्ट्री, सुअर पालन, बकरी पालन जैसे क्षेत्र राज्य के पशुधन विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने वीओटीआई प्रशिक्षण कार्यक्रमों और तकनीक हस्तांतरण के माध्यम से आईवीआरआई के साथ सतत समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया।

आईवीआरआई के डॉ. त्रिवेणी दत्त, निदेशक-सह-कुलपति ने संस्थान की अनुसंधान सुविधाओं, रोग प्रकोप जांच, नस्ल संरक्षण, तकनीक हस्तांतरण एवं जैविक उत्पादों की गुणवत्ता जांच पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हाल ही में संस्थान को यूजीसी द्वारा नैक (A++) ग्रेड प्रदान किया गया है।

बैठक में अल्ट्रासोनोग्राफी, रेडियोग्राफी, पोस्टमार्टम, क्लिनिकल पैथोलॉजी, प्रजनन तकनीक और पशुधन स्वास्थ्य प्रबंधन जैसे प्रशिक्षण की मांग की गई। प्रतिभागियों ने एफएमडी, एलएसडी, पॉक्‍स रोगों के स्ट्रेन विश्लेषण, एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस, बहुवैलेंट वैक्सीन विकास और किसानों के लिए नवीन डायग्नोस्टिक किट पर चर्चा की।

कार्यक्रम का उद्घाटन श्री सुरेश कुमार वशिष्ठ ने किया, जबकि अध्यक्षता डॉ. त्रिवेणी दत्त ने की। समापन सत्र में डॉ. त्रिवेणी दत्त ने सभी प्रतिभागियों और आयोजकों का धन्यवाद किया।

हिन्दुस्थान समाचार / देश दीपक गंगवार