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धनबाद, 07 जनवरी (हि.स.)। अब तक माइंस रेस्क्यू में पुरुष ही दक्ष होते रहें हैं, लेकिन अब लड़कियां भी खदान के बीच अपना साहस और जाबांजी दिखाने के लिए तैयार हैं। 2024 में कोलंबिया में हुए 13वें इंटरनेशनल माइन रेस्क्यू प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए ट्रॉफी जीतने वाले महिला एवं पुरुष रेस्क्यू प्रशिक्षित कर्मियों को मंत्री के हाथों सम्मान मिला है।
खान हादसों से निपटना हमेशा ही चुनौती भरा रहा है। ऐसे में अब तक माइंस रेस्क्यू में पुरुष ही दक्ष होते रहें हैं। जबकि हिंदुस्तान जिंक प्राइवेट लिमिटेड की महिला कर्मियों की एक रेस्क्यू टीम भी अब अपना साहस और जाबांजी दिखाने के लिए तैयार हैं। ये हिंदुस्तान की पहली महिला रेस्क्यू टीम है, जिन्होंने 2024 में कोलंबिया में हुए 13वें इंटरनेशनल माइन रेस्क्यू कॉम्पिटिशन में ट्रॉफी जीतकर भारत का मान बढ़ाया। ऐसे जांबाज महिला रेस्क्यू टीम को डीजीएमएस के 125वें स्थापना दिवस समारोह में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री शोभा करंदलाजे ने अपनी हाथों सम्मानित किया। इनके अलावे डब्ल्यूसीएल के रेस्क्यू टीम को भी सम्मानित किया गया, उन्होंने कोलम्बिया में हुए माइन रेस्क्यू कॉम्पिटिशन में हिस्सा लेकर अपनी दक्षता का बखूबी प्रदर्शन किया।
महिला रेस्क्यू टीम से संध्या सिंह ने बताया कि खान हादसों से निपटना चुनौती पूर्ण है और यह चुनौती अलग-अलग हादसों में अलग-अलग चुनौती भरा होता है। डब्ल्यूसीएल रेस्क्यू टीम हेड दिनेश कुमार ने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होनेवाले कम्पटीशन में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए भारत के लिए पुरस्कार पाना काफ़ी गौरवान्वित करता है।
उल्लेखनीय है कि इंटरनेशनल माइन रेस्क्यू कॉम्पिटिशन में भारत, कनाडा, आस्ट्रेलिया समेत 23 देशों के प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। माइंस रेसक्यू में दक्षता हासिल करनेवाली हिंदुस्तान जिंक की यह पहली महिला रेसक्यू टीम है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार झा