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बरेली, 07 जनवरी (हि.स.) । उत्तर प्रदेश के बरेली जनपद में निराश्रित गोवंशों के संरक्षण और बेहतर देखभाल के लिए प्रशासन स्तर पर व्यापक और ठोस प्रयास किए जा रहे हैं।
मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मनमोहन पाण्डे ने बुधवार को बताया कि जिले में वर्तमान में 113 गौ आश्रय स्थल संचालित हैं, जिनमें 13 वृहद गो-संरक्षण केन्द्र, 89 अस्थायी गो-आश्रय स्थल, 9 कान्हा गौशाला और 2 कांजी हाउस शामिल हैं। इन सभी स्थलों पर कुल 17,686 गोवंश सुरक्षित रखे गए हैं।
शीतलहर और कड़ाके की सर्दी को देखते हुए सभी गौशालाओं में शेडों को तिरपाल से कवर कराया गया है। साथ ही गोवंशों को सर्दी से बचाने के लिए नियमित रूप से अलाव जलाने के निर्देश दिए हैं। चारे की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जनपद स्तर पर भूसा की वर्ष भर आपूर्ति के लिए टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
हरे चारे की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से वर्ष 2025-26 में चारा नीति के अंतर्गत नैपीयर घास के सीड बैंक की योजना लागू की गई है। इसके तहत 14 लाभार्थियों के आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिन्हें शासनादेश के अनुसार 20 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
जिलाधिकारी और मुख्य विकास अधिकारी के सहयोग से 77 गौ आश्रय स्थलों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा चुके हैं, जिनकी निगरानी के लिए जनपद स्तर पर कंट्रोल रूम स्थापित किया जा रहा है।
निराश्रित गोवंशों के संरक्षण को और मजबूत करने के लिए पांच नए वृहद गौ संरक्षण केन्द्रों का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें से दो केन्द्र जनवरी 2026 में क्रियाशील हो जाएंगे। इसके अलावा 10 गौ आश्रय स्थलों में अतिरिक्त शेड बनाए जा रहे हैं। प्रशासन ने सभी गौशालाओं के सतत निरीक्षण के लिए नोडल अधिकारियों की तैनाती के साथ प्रत्येक स्थल पर पैरावेट की नियुक्ति भी सुनिश्चित की है।
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हिन्दुस्थान समाचार / देश दीपक गंगवार