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जयपुर, 07 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु पद पर प्रोफेसर अल्पना कटेजा की नियुक्ति के खिलाफ दायर याचिका दायर करने वाले याचिकाकर्ता को कहा है कि वह याचिका पर सुनवाई चाहता है तो पहले पांच लाख रुपये जमा कराए। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश प्रोफेसर महिपाल सिहाग की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिए।
याचिका में अधिवक्ता सविता सिहाग ने अदालत को बताया कि राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलपति के पद पर नियुक्ति के लिए 1 अगस्त, 2023 को विज्ञापन जारी किया गया था। जिसमें प्रोफेसर अल्पना कटेजा ने आवेदन किया था। याचिका में आरोप लगाया गया कि आवेदन करते समय अल्पना कटेजा ने अपने खिलाफ लंबित आपराधिक प्रकरण की जानकारी नहीं दी। जबकि नियमानुसार उन्हें इस संबंध में जानकारी देनी चाहिए थी। ऐसे में उन्होंने तथ्य छिपाकर नियमों की अवहेलना की है। इसलिए कुलपति पद पर उनके चयन को निरस्त किया जाए। याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति जताते हुए अल्पना कटेजा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएन माथुर ने अदालत को बताया कि याचिकाकर्ता सहित कई अन्य दर्जनों लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई थी। शिकायत में भी अल्पना कटेजा पर स्पष्ट तौर पर कोई आरोप नहीं था। वहीं यह शिकायत भी खारिज हो चुकी है और उसकी रिविजन लंबित चल रही है। इसके अलावा याचिकाकर्ता स्वयं पर आपराधिक मामला दर्ज है, लेकिन उन्होंने याचिका दायर करते समय इसकी जानकारी अदालत को नहीं दी है। ऐसे में वह स्वयं तथ्य छिपाकर याचिकाकर्ता के खिलाफ तथ्य छिपाने का आरोप लगा रहा है। इसलिए याचिका को खारिज किया जाए। इस पर अदालत ने याचिकाकर्ता को कहा कि वह पहले पांच लाख रुपये जमा कराए, उसके बाद याचिका पर सुनवाई की जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक