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जयपुर, 07 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती-2024 से जुड़े मामले में आरपीएससी सचिव को 8 जनवरी को सुनवाई के दौरान वीसी से जुडने के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि इस दौरान सचिव सभी जरूरी दस्तावेज भी साथ रखे। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने यह आदेश सृष्टि सिंघल व अन्य की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले में नोटिस जारी करने के बाद उनकी तामील में हो चुकी है, लेकिन आयोग की ओर से कोई पेश नहीं हुआ और केस के ओआईसी भी हाजिर नहीं हुए। ऐसे में आयोग सचिव इस संबंध में अपना उचित स्पष्टीकरण दें।
याचिका में अधिवक्ता तनवीर अहमद ने अदालत को बताया कि आरपीएससी ने सहायक अभियोजन अधिकारी के 180 पदों भर्ती निकाली थी। जिसमें मुख्य परीक्षा में करीब तीन हजार अभ्यर्थी शामिल हुए। वहीं आयोग ने इनमें से सिर्फ 4 अभ्यर्थियों को ही सफल घोषित किया और आयोग के परिणाम के अनुसार अन्य अभ्यर्थी न्यूनतम अनिवार्य चालीस फीसदी अंक भी नहीं ला सके। याचिका में कहा गया कि भर्ती परीक्षा में शामिल कई अभ्यर्थी ऐसे भी हैं, जिन्होंने राजस्थान न्यायिक सेवा परीक्षा में चालीस फीसदी से अधिक अंक हासिल किये थे। आरजेएस परीक्षा सहायक अभियोजन अधिकारी भर्ती परीक्षा से कहीं अधिक कठिन परीक्षा मानी जाती है। इसके बावजूद ऐसे अभ्यर्थियों को इस परीक्षा में असफल कर दिया गया। याचिका में कहा गया कि आयोग की ओर से जारी यह परिणाम मनमाना, अव्यावहारिक और संविधान के मूल अधिकारों के खिलाफ है। याचिका में आशंका जताई गई है कि परीक्षा के मूल्यांकन में त्रुटिपूर्ण मॉडल उत्तर और अत्यधिक कठोर अंकन कर मशीनी अंदाज में कॉपियां जांची गई है। ऐसे में परीक्षा परिणाम को रद्द कर नए सिरे उत्तर पुस्तिकाओं की जांच कर संशोधित परिणाम जारी किया जाए।
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हिन्दुस्थान समाचार / पारीक