डायन कुप्रथा को बढावा देनेवालों पर प्रशासन करेगा कडी कार्रवाई : उपायुक्‍त
धनबाद, 07 जनवरी (हि.स.)। डायन कुप्रथा उन्मूलन, बाल विवाह मुक्त झारखंड, मिशन शक्ति के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार की सभी कल्याणकारी याेजनाओं को लेकर बुधवार को न्यू टाउन हॉल में अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।
बाल विवाह का विरोध करने वाली अनुराधा को सम्मानित करते विधायक


धनबाद, 07 जनवरी (हि.स.)। डायन कुप्रथा उन्मूलन, बाल विवाह मुक्त झारखंड, मिशन शक्ति के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार की सभी कल्याणकारी याेजनाओं को लेकर बुधवार को न्यू टाउन हॉल में अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में उपायुक्‍त आदित्य रंजन ने महिलाओं को सुरक्षित और सशक्त बनाकर सशक्त झारखंड के निर्माण के लिए डायन कुप्रथा एवं बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति को दूर करने, महिलाओं की सुरक्षा तथा बालिकाओं की शिक्षा के लिए तत्पर रहने की सभी को शपथ दिलाई।

उपायुक्त ने कहा कि डायन कुप्रथा और बाल विवाह समाज के लिए गंभीर मुद्दा है एवं समाज पर इसका दुष्प्रभाव पड़ता है। ऐसी कुप्रथाओं की रोकथाम के लिए सभी को सावधान, सचेत और सक्रिय रहना होगा। यह तभी संभव होगा जब हर नागरिक जागरुक बनेगा।

उपायुक्त ने कहा कि सभी प्लस टू विद्यालयों में ऐसी कार्यशाला का आयोजन कर बच्चियों को कुप्रथा के विरुद्ध जागरूक किया जाएगा। वहीं कुप्रथा को बढ़ावा देने वालों को चेतावनी देते हुए उन्‍होंने कहा कि कुप्रथा में शामिल लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई जिला प्रशासन करेगा। कुप्रथा को रोकने के लिए जिला स्तरीय कंट्रोल रूम को सशक्त बनाया जाएगा। उन्‍होंने कहा कि जिले में भ्रमणशील सिटी हॉक्स भी निगरानी रखेंगे।

मौके पर विधायक राज सिन्हा ने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए सख्त बने हैं। इसकी रोकथाम के लिए समाज के हर व्यक्ति को अपनी भागीदारी और जवाबदारी सुनिश्चित करनी होगी।

जिला परिषद की अध्यक्ष शारदा सिंह ने कहा कि बाल विवाह की रोकथाम के लिए पहला कदम बच्चियों की माता को उठाना चाहिए। कहा कि बाल विवाह के कारण बच्चियों को मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना से गुजरना पड़ता है। वहीं जिला परिषद की उपाध्यक्ष सरिता देवी ने कहा कि बाल विवाह के कारण बच्चे अपने बचपन और शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।

उप विकास आयुक्त सन्नी राज ने कहा कि समाज को कुप्रथाओं की संवेदनशीलता को समझने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि बाल विवाह को रोक कर बच्चों का भविष्य सुदृढ़ किया जा सकता है। मौके पर उन्होंने विभिन्न कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी।

अनुमंडल पदाधिकारी लोकेश बारंगे ने कहा कि ये कुप्रथा समाज के लिए अभिशाप है। समाज में जागरूकता लाने से इसकी रोकथाम संभव है।

वहीं कार्यक्रम में कुमारडीह की अनुराधा कुमारी को सम्मानित किया गया। अनुराधा कुमारी ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा कि जब वह 16 वर्ष की थी तो घर वालों ने उसकी शादी तय कर दी थी। उन्‍होंने कहा कि उनकी ऊंचाई कम थी इसलिए माता-पिता ने शादी करने का भारी दबाव बनाया था। लेकिन हिम्मत रखकर उसने झारखंड ग्रामीण विकास ट्रस्ट से संपर्क कर स्वयं का बाल विवाह पर रोक लगवाया। अनुराधा ने अन्‍य लड़कियों को भी बाल विवाह का विरोध करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यशाला में मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, राज्य विधवा पुनर्विवाह प्रोत्साहन योजना सहित राज्य सरकार की अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं की सभी को जानकारी दी गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / राहुल कुमार झा