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पश्चिमी सिंहभूम, 07 जनवरी (हि.स.)। जिले के जगन्नाथपुर में क्षेत्र की गंभीर पेयजल समस्या को लेकर बुधवार को आदिवासी किसान मजदूर पार्टी के सह जिला परिषद सदस्य मानसिंह तिरिया के नेतृत्व में स्थानीय लोगों ने अनुमंडल कार्यालय के समीप 48 घंटे का उपवास शुरू किया।
उपवास के माध्यम से ग्रामीणों ने वर्षों से चले आ रहे जल संकट, खराब पड़े चापाकलों और जल मीनारों की अनदेखी को लेकर प्रशासन और सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
उपवास स्थल पर नेताओं और ग्रामीणों ने बताया कि जगन्नाथपुर क्षेत्र के गांवों में लंबे समय से पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। ग्रामीण इलाकों में लगभग आधे चापाकल खराब पड़े हैं, जिससे लोगों को दूर-दराज के स्रोतों से पानी लाने को विवश हैं। कई बार संबंधित विभाग से मरम्मती की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि डीएमएफटी फंड, जिसका उपयोग पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने में किया जाना चाहिए, वह लूट का फंड बन गया है और इस राशि को पीसीसी पथ निर्माण जैसे कार्यों में खर्च कर कमीशनखोरी की जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान यह भी कहा गया कि जब भी ग्रामीण पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी जरूरतों को लेकर आवाज उठाया जाता है तो प्रशासन की ओर से उन पर केस दर्ज कर दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है। इससे गरीब और आदिवासी समुदाय की समस्याएं और गहरी हो रही हैं। लोगों ने कहा कि पानी जीवन का सबसे बहुमूल्य संसाधन है और वे किसी की जमीन या हक नहीं, बल्कि केवल पीने का साफ पानी मांग रहे हैं। जिला परिषद की सामान्य बैठक में बार-बार चापाकल और जल मीनार की मरम्मती का मुद्दा उठाने के बावजूद कार्रवाई नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।
प्रदर्शनकारियों ने झारखंड सरकार पर भी क्षेत्र की उपेक्षा का आरोप लगाया और मांग किया कि जगन्नाथपुर सहित आसपास के सभी गांवों में खराब पड़े चापाकल और जल मीनारों की मरम्मती तत्काल कराई जाए, ताकि ग्रामीणों को पेयजल संकट से राहत मिल सके।
उपवास स्थल पर चुम्बूरू पिगुवा, नरसिंह पुरति, बिन्दराय सुरेन, रधुनाथ पिंगुवा, लखन हेस्सा, कान्डे राम, गोवर्धन नायक, भुषण तिरिया, सचिन तिरिया सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थेे।
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हिन्दुस्थान समाचार / गोविंद पाठक