बलरामपुर : ईपीएफओ की बड़ी पहल, सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे असंगठित श्रमिक, दो नई योजनाएं लागू
बलरामपुर, 07 जनवरी (हि.स.)। कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के व्यापक दायरे में लाने की दिशा में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने दो महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। इन पहलों के माध्यम से असंगठित एवं अब तक पंजीकरण से वंचित श्रमिकों को भविष्य निधि स
बलरामपुर : ईपीएफओ की बड़ी पहल, सामाजिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे असंगठित श्रमिक, दो नई योजनाएं लागू


बलरामपुर, 07 जनवरी (हि.स.)। कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा के व्यापक दायरे में लाने की दिशा में कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने दो महत्वपूर्ण पहल शुरू की हैं। इन पहलों के माध्यम से असंगठित एवं अब तक पंजीकरण से वंचित श्रमिकों को भविष्य निधि से जोड़ने के साथ-साथ नए रोजगार सृजन को प्रोत्साहन देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

ईपीएफओ द्वारा शुरू किए गए कार्यक्रमों में कर्मचारी नामांकन अभियान 2025 तथा पीएम विकसित भारत रोजगार योजना (पीएम व्हीबीआरवाय) शामिल हैं। कर्मचारी नामांकन अभियान 2025 की अवधि 1 नवंबर 2025 से 30 अप्रैल 2026 तक निर्धारित की गई है, जिसके तहत अनरजिस्टर्ड एवं असंगठित श्रमिकों को ईपीएफ एंड एमपी एक्ट 1952 के दायरे में लाया जाएगा। इस अभियान का उद्देश्य श्रमिकों को भविष्य निधि, पेंशन और बीमा जैसी सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं से जोड़ना है।

वहीं पीएम विकसित भारत रोजगार योजना के अंतर्गत नियोक्ताओं को नए कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। योजना के माध्यम से औपचारिक रोजगार को बढ़ावा देने और श्रमिकों के लिए सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।

ईपीएफओ द्वारा सभी संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि ईपीएफ एंड एमपी एक्ट 1952 के अंतर्गत मिलने वाले लाभ अनुबंधित एवं नियमित कर्मचारियों को समान रूप से प्रदान किए जाएं। साथ ही संबंधित संस्थाओं का ईपीएफओ पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए।

इसके अतिरिक्त शासकीय विभागों, सार्वजनिक उपक्रमों, नगरीय निकायों तथा सहकारी संस्थाओं में कार्यरत ठेका एवं आकस्मिक श्रमिकों को भी सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाने के निर्देश दिए गए हैं। ईपीएफ अंशदान की समय पर जमा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि श्रमिकों को योजनाओं का पूरा लाभ मिल सके।

ईपीएफओ की इन पहलों को श्रमिक हित में एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे सामाजिक सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सशक्त करने के साथ-साथ श्रमिकों के भविष्य को सुरक्षित किया जा सकेगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / विष्णु पांडेय