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वाराणसी, 05 जनवरी (हि.स.)। माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि गणेश चतुर्थी को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है। इस बार गणेश चतुर्थी (संकष्ठी चतुर्थी) मंगलवार को मनाई जाएगी। सनातनी पंचाग के अनुसार, इस बार माघ मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी तिथि 6 जनवरी को सुबह 08:01 बजे प्रारंभ होकर अगले दिन 7 जनवरी 2026 को सुबह 06:52 बजे समाप्त होगी। ऐसे में गणेश चतुर्थी मंगलवार को ही मनेगी।
पर्व को लेकर लोहटिया स्थित बड़ा गणेश सहित नगर के सभी छोटे-बड़े गणेश मंदिरों में सोमवार को तैयारियों को अन्तिम रूप दिया जा रहा है। लोहटिया बड़ा गणेश मंदिर में लाखों की भीड़ उमड़ती है, इसे देखते हुए मंदिर और गली के साथ आसपास जगह-जगह बैरिकेडिंग की जा रही है, ताकि दर्शन के दौरान किसी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
मंदिर के पुजारी राजेश तिवारी ने बताया कि गणेश चतुर्थी के दिन बड़ा गणेश जी के दर्शन का विशेष महत्व है। इस दिन विशेष रूप से महिलाएं संतान प्राप्ति या अपने बच्चों की दीर्घायु के लिए व्रत रखती हैं। उन्होंने बताया कि यह परंपरा वर्षों पुरानी है और हर साल निभाई जाती है। अनुमान है कि गणेश चतुर्थी पर लगभग 3 लाख श्रद्धालु बड़ा गणेश मंदिर में दर्शन के लिए आएंगे।
श्रद्धालु महिलाएं भगवान गणेश को दूर्वा, मोदक, तिल के लड्डू, पीले पुष्प अर्पित करती है। रात्रि में चंद्रदेव को अर्घ्य देने के बाद ही अपना व्रत पूर्ण करती है। पुजारी ने बताया कि जिला प्रशासन और मंदिर समिति की ओर से व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण और सुगमता से दर्शन कर सकें।
भगवान गणेश के जीवन पर आया संकट टला था
पुजारी राजेश तिवारी ने बताया कि शास्त्रों के अनुसार, माघ मास की इसी चतुर्थी के दिन भगवान गणेश के जीवन में आया सबसे बड़ा संकट टला था। भगवान शिव के साथ युद्ध के बाद उन्हें हाथी का सिर लगाकर नया जीवन मिला था। यह दिन उनके पुनर्जन्म और मंगलकारी रूप की स्थापना का उत्सव भी है। भगवान गणेश 'विघ्नहर्ता', दुखों को हरने वाले हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से गणेश जी प्रसन्न होते हैं और संतान पर आने वाले सभी संकटों को दूर कर देते हैं, इसीलिए इसे 'सकट चौथ' भी कहा जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / श्रीधर त्रिपाठी