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जोधपुर, 05 जनवरी (हि.स.)। राजस्थान उच्च न्यायालय ने फिल्म निर्माण से जुड़े करोड़ों रुपये के कथित गबन और धोखाधड़ी मामले में अहम फैसला सुनाया। न्यायमूर्ति समीर जैन ने फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से साफ इनकार कर दिया है। अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया गंभीर आपराधिक आरोप बनते हैं, और मामले में विस्तृत जांच जरूरी है।
यह मामला उदयपुर के भूपालपुरा थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है। इसमें फिल्म निर्माता विक्रम भट्ट और अन्य पर लगभग 47 करोड़ रुपए के निवेश में से 2.5 करोड़ रुपये के गबन, फर्जी बिलों, धन के डायवर्जन और आपराधिक षड्यंत्र के आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि यह विवाद एक व्यावसायिक और संविदात्मक मुद्दा है, जिसे आपराधिक रंग दिया गया है, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि एफआईआर से यह स्पष्ट होता है कि धनराशि को तय उद्देश्य के बजाय अन्य खातों और फर्जी वेंडरों के जरिए घुमाया गया। प्रारंभिक जांच में व्हाट्सएप चैट, वित्तीय लेन-देन और दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया आपराधिक मंशा के संकेत मिले हैं।
कोर्ट ने यह भी कहा कि एफआईआर दर्ज करने से पहले प्रारंभिक जांच की गई थी, इसलिए प्रक्रिया में किसी प्रकार की अवैधता नहीं है। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि जांच के प्रारंभिक चरण में हस्तक्षेप अपवाद है, नियम नहीं। अदालत ने याचिकाकर्ताओं की मंशा पर भी सवाल उठाए और कहा कि उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाया है, जैसे अन्य अदालतों में दायर जमानत याचिकाएं। अंतत: हाईकोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष और पूर्ण जांच जारी रहेगी तथा किसी भी अंतरिम राहत को समाप्त माना जाएगा।
हिन्दुस्थान समाचार / सतीश