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जींद, 05 जनवरी (हि.स.)। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन के ट्रायल को लेकर अभी कोई आधिकारिक सूचना नहीं आई है लेकिन इस ट्रेन के ट्रायल को देखने के लिए लोगों में बहुत उत्साह है। हालांकि हाइड्रोजन ट्रेन को कड़ी सुरक्षा के बीच हाइड्रोजन प्लांट में रखा गया है। बावजूद इसके प्रतिदिन लोग बाहर से ही इस ट्रेन को देखने के लिए पहुंच रहे हैं। ट्रेन की फोटो या वीडियो बनाने की बात आती है, तो हाइड्रोजन प्लांट अधिकारियों द्वारा साफ तौर पर मना कर दिया जाता है। अधिकारियों द्वारा लगातार हाइड्रोजन प्लांट में ही हाइड्रोजन ट्रेन के रखरखाव का काम किया जा रहा है।
फिलहाल ट्रायल कब होगा, इसकी कोई आधिकारिक सूचना नहीं है। आठ डिब्बों की यह ट्रेन हाइड्रोजन से चलने वाली और हाइब्रिड तकनीक पर आधारित होगी। जिसमें अक्षय ऊर्जा भंडारण जैसे बैटरी या सुपर कैपेस्टर लगे होंगे। इंजन में डीजल की जगह फ्यूल सेल, हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का उपयोग किया जाएगा। ऑक्सीजन की मदद से हाइड्रोजन नियंत्रित ढंग से जलेगी, जिससे बिजली पैदा होगी। यह बिजली लिथियम बैटरी को चार्ज करेगी। जिससे ट्रेन चलेगी। ट्रेन में 1200-1200 हॉर्स पावर के दो इंजन हैं। ट्रेन को प्रति घंटे 40 हजार लीटर पानी की आवश्यकता होगी। जिसके लिए स्टेशन की छतों से पानी भी प्लांट तक पहुंचाया जाएगा। कयास लगाए जा रहे हैं कि 26 जनवरी को यह ट्रेन ट्रेक पर दौड़ेगी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसी माह ट्रेन का उद्घाटन करेंगे लेकिन इसकी कोई अधिकारी पुष्टि नहीं हुई है। हाइड्रोजन ट्रेन में यात्री 25 रुपये में जींद से सोनीपत का 89 किलोमीटर का सफर एक घंटे में तय करेंगे।
प्लांट के अंदर ट्रेन की टेस्टिंग का काम चल रहा है। हाइड्रोजन गैस से चलने वाले इंजन धुएं की बजाय भाप और पानी छोड़ेंगे। जिससे प्रदूषण नहीं होगा। इलेक्ट्रिक ट्रेनों की तुलना में हाइड्रोजन ट्रेन 10 गुना अधिक दूरी तय कर सकती है। यह ट्रेन 360 किलोग्राम हाइड्रोजन में 180 किलोमीटर का सफर करेगी। हाइड्रोजन प्लांट मैनेजर संजय ने बताया कि अभी तक ट्रेन के ट्रायल को लेकर कोई अधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जब भी ट्रायल होगा तो इसके बारे में सबको अवगत करवाया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / विजेंद्र मराठा