कोहरे की परत , ठाणे खाड़ी की तस्वीर के पीछे प्रदूषण का खतरा
मुंबई, 05जनवरी ( हि.स.) । ठाणे शहर कोहरे की घनी चादर में खो गया। खाड़ी के सामने पहाड़ों की रेंज, सूरज की रोशनी और पूरा शहर का इलाका एक ही समय में कोहरे के पीछे छिपा हुआ लग रहा था। हालांकि सोमवार सुबह दिखा यह नज़ारा एक पल के लिए सुंदर और शांत लग रहा
Danger of pollution behind haze of log


Danger of pollution behind the haze of log


मुंबई, 05जनवरी ( हि.स.) । ठाणे शहर कोहरे की घनी चादर में खो गया। खाड़ी के सामने पहाड़ों की रेंज, सूरज की रोशनी और पूरा शहर का इलाका एक ही समय में कोहरे के पीछे छिपा हुआ लग रहा था। हालांकि सोमवार सुबह दिखा यह नज़ारा एक पल के लिए सुंदर और शांत लग रहा था, लेकिन इस कोहरे के पीछे छिपे गंभीर पर्यावरण के खतरे को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।

ठाणे निवासी जहां गुलाबी ठंड का मज़ा ले रहे हैं, वहीं शहर में घना कोहरा दिखना बदलते मौसम के साथ बढ़ते प्रदूषण का संकेत माना जा रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि गाड़ियों की बढ़ती संख्या, इंडस्ट्री और कंस्ट्रक्शन से निकलने वाले बारीक प्रदूषक कण, खाड़ी इलाके में सीमेंटीकरण और हरियाली में कमी के कारण कोहरे के साथ-साथ हवा में प्रदूषण भी घना होता जा रहा है।

इस बदलाव पर बोलते हुए डॉ प्रशांत रवींद्र सिनकर ने कहा कि कोहरे के कारण विज़िबिलिटी कम होने पर हवा में फंसे प्रदूषक कण बाहर निकलने के बजाय शहर पर जम जाते हैं। नतीजतन, सांस की बीमारियां, एलर्जी, अस्थमा और दिल की बीमारी जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। यानी, स्मॉग में खोया ठाणे शहर सिर्फ देखने में बदलाव नहीं है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी चिंता की बात है।मैंग्रोव का बचाव, पहाड़ियों पर पेड़ों की कटाई को रोकना, खाड़ी और शहर में प्रदूषण पर असरदार कंट्रोल, और सस्टेनेबल और इको-फ्रेंडली डेवलपमेंट पर ज़ोर देना आज की सबसे ज़रूरी ज़रूरतें हैं। नहीं तो, ऐसा स्मॉग प्रकृति की सुंदरता का प्रतीक न रहकर इंसानों की बनाई आपदा का रूप ले सकता है।

पर्यावरणविद डॉ प्रशांत सिनकर ने बताया कि भले ही शहर स्मॉग में खो गया हो, लेकिन उस स्मॉग में छिपा प्रदूषण का खतरा ज़्यादा साफ़ है। यह नज़ारा प्रकृति की तरफ़ से दी गई एक साफ़ चेतावनी है:चलो अब रुकें, बदलाव करें; नहीं तो सांस लेना मुश्किल हो जाएगा।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा