Enter your Email Address to subscribe to our newsletters

-नाबालिग बच्ची की फोटो से भरी मस्टर रोल
हमीरपुर, 04 जनवरी (हि.सं.)। सरकार ने भले ही मनरेगा का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एवं आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी जी राम जी) कर दिया हो, लेकिन उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में ज़मीनी हकीकत में भ्रष्टाचार की तस्वीर जस की तस बनी हुई है। भीषण ठंड में नाबालिग समेत तमाम फर्जी मजदूरों की हाजिरी दर्ज कर फर्जीवाड़ा करने का मामला आज रविवार को सामने आने के बाद पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए गए है।
उत्तर प्रदेश के जनपद हमीरपुर के मुस्करा ब्लॉक में योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों में फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां कड़ाके की सर्दी में गमछा बनियान पहने मजदूरों और एक नाबालिग बच्ची की तस्वीरें अपलोड कर हजारों मजदूरों की फर्जी हाजिरी दर्शा दी गई। मामला एक जनवरी का है, जब भीषण ठंड के बीच मुस्करा ब्लॉक की 16 ग्राम पंचायतों के 51 कार्यों के लिए 309 मस्टर रोल में 2,913 मजदूरों के काम करने का दावा किया गया। लेकिन जब मस्टर रोल में अपलोड की गई तस्वीरों की पड़ताल की गई, तो सच्चाई चौंकाने वाली निकली। अपलोड तस्वीरों में कहीं भी सैकड़ों मजदूर दिखाई नहीं दे रहे। महज 40 लोग दिखने वाली एक ही फोटो को 15 से 20 बार तक अलग-अलग मस्टर रोल में अपलोड कर दिया गया। यही नहीं, कई मजदूरों की वही तस्वीरें एक से अधिक ग्राम पंचायतों के कार्यों में दोहराई गईं, जिससे साफ है कि हाजिरी पूरी तरह फर्जी तरीके से भरी गई।
भ्रष्टाचार की हद तब पार हो गई जब मजदूरों के बीच एक नाबालिग बच्ची को खड़ा कर उसकी फोटो खींची गई और उसे भी सरकारी पोर्टल पर अपलोड कर दिया गया। यह न सिर्फ नियमों का उल्लंघन है, बल्कि बाल श्रम कानूनों की खुली अवहेलना भी है। ग्राम पंचायत गहरौली में सीसी रोड से धरम मास्टर के खेत तक खड़ंजा कार्य सहित अन्य कार्यों में 437 मजदूर, खड़ेही लोधन में नाला खुदाई और तालाब सौंदर्यीकरण में 472 मजदूर, कंधौली में 316, बसवारी में 188, गुंदेला में 222 मजदूरों के काम करने का दावा किया गया। जबकि हकीकत में किसी भी फोटो में इतने मजदूर नजर नहीं आते। यही स्थिति टीहर, बिहुनी कलां, रूरी पारा, बसवारी समेत अन्य पंचायतों की भी है।
जांच पड़ताल में यह भी सामने आया है कि कई जगह पुरानी तस्वीरों को दोबारा अपलोड कर नए मस्टर रोल भर दिए गए। यानी काम चाहे हुआ हो या नहीं, भुगतान निकालने की पूरी तैयारी पहले से कर ली गई थी। योजना का नाम बदला, लेकिन सिस्टम नहीं बदला। सरकारी धन की खुली लूट हो रही है और जिम्मेदार अधिकारी या तो आंख मूंदे बैठे हैं या फिर सब कुछ जानकर भी अनजान बने हुए हैं। इस पूरे मामले पर रविवार को डीसी मनरेगा राघवेंद्र सिंह ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है। जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन अब बड़ा सवाल यह है कि क्या सिर्फ जांच होगी या फिर इस संगठित फर्जीवाड़े पर ठोस कार्रवाई भी नजर आएगी?
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / पंकज मिश्रा