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- भू-स्वामित्व नामांतरण और लैंड यूज़ चेंज की प्रक्रिया होगी आसान, किया जा रहा है डिजिटल सरलीकरण
-लैंड यूज़ चेंज और नामांतरण प्रक्रिया में सुधार से बढ़ेगा ग्रामीण क्षेत्र में औद्योगिक निवेश
लखनऊ, 04 जनवरी (हि.स.)। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के मुताबिक प्रदेश सरकार ने भूमि संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं को और अधिक सरल, पारदर्शी, तेज और नागरिक-केंद्रित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इस दिशा में स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग और राजस्व परिषद के संयुक्त प्रयासों से भू स्वामित्व में नामांतरण की धारा-34 और लैंड यूज चेंज की धारा 80 की प्रक्रियाओं का डिजिटल सरलीकरण किया जा रहा है। इसके लिए राष्ट्रीय सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र (एनआईसी) द्वारा विकसित सॉफ्टवेयर के माध्यम से प्रक्रिया को एकीकृत प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। प्रक्रिया को फरवरी 2026 तक पूरा करने की समय सीमा निर्धारित की गई है। यूपी सरकार की इस पहल से प्रदेश के लाखों किसानों, भू-मालिकों और उद्योगपतियों को अनावश्यक कागजी कार्रवाई से मुक्ति मिलेगी, साथ ही डिजिटल तकनीक के माध्यम से कार्रवाई भी तेज और अधिक पारदर्शी हो सकेगी।
धारा-34 के तहत नामांतरण प्रक्रिया को बनाया जा रहा डिजिटल और सरल
प्रदेश सरकार के एक प्रवक्ता ने बताया कि स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग और राजस्व परिषद के संयुक्त प्रयासों से भूमि संबंधी प्रशासनिक प्रक्रियाओं का डिजिटलाइजेशन और सरलीकरण किया जा रहा है। इस क्रम में भू-संपत्ति हस्तांतरण के दौरान नामों के बदलाव की धारा-34 के तहत नामांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल बनाया जा रहा है। जिसके तहत सभी आवश्यक जानकारियां जैसे- खसरा-खतौनी विवरण, मालिकाना हक के प्रमाण और अन्य अभिलेख ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के जरिए एक ही बार में संकलित की जाएंगी। ऑनलाइन अपलोड होते ही डिजिटल डेटा फ्लो के जरिए अभिलेखों की जांच की जाएगी। जिससे इस प्रक्रिया में पारंपरिक रूप से कई स्तरों पर फॉर्म भरने, दस्तावेज जमा करने और लेखपाल की आख्या की प्रतीक्षा में लगने वाले समय में कमी आएगी। साथ ही कार्यप्रणाली आमजन के लिए अधिक सरल और पारदर्शी हो सकेगी।
लैंड यूज चेंज प्रक्रिया की धारा-80 का भी हो रहा है डिजिटलीकरण
कृषि भूमि को गैर-कृषि या औद्योगिक उपयोग में बदलने से संबंधित धारा 80 के अंतर्गत लैंड यूज चेंज प्रक्रिया का भी डिजिटलीकरण किया जा रहा है। इस प्रक्रिया में पहले आवेदन, अनुमोदन और अभिलेख अपडेट के लिए बार-बार दौड़-भाग करनी पड़ती थी। अब सभी जरूरी जानकारियां जैसे भूमि का खसरा-खतौनी विवरण, मौजूदा उपयोग की स्थिति और आसपास के क्षेत्र की जानकारियां ऑनलाइन आवेदन फॉर्म में एक बार में ही ली जाएगीं। अनावश्यक औपचारिकताओं को हटाकर डिजिटल जांच की व्यवस्था की गई है, जिससे लेखपाल द्वारा बार-बार रिपोर्टिंग की जरूरत समाप्त हो जाएगी। विभाग ने आवेदन फॉर्म, आख्या रिपोर्ट्स और सर्टिफिकेट के सरल प्रारूप का परीक्षण पूरा कर लिया है।
ऑनलाइन पोर्टल, एसएमएस या व्हाट्सएप के माध्यम से भेजे जाएगें नोटिस
प्रक्रिया संबंधित सभी नोटिस अब पारंपरिक डाक के बजाय ऑनलाइन पोर्टल, एसएमएस या व्हाट्सएप के माध्यम से प्रेषित किए जाएंगे। जिससे आवेदक को तत्काल सूचना मिले सकेगी, साथ ही लेखपाल की आख्या की आवश्यकता को न्यूनतम किया जाएगा। स्टाम्प एवं पंजीकरण विभाग से आवश्यक एपीआई एकीकरण किया जा रहा है, जो डेटा फ्लो को अधिक प्रभावी बनाएगा। प्रक्रिया के तहत नामांतरण प्रमाणपत्र और लैंड यूज चेंज सर्टिफिकेट कुछ ही दिनों में ऑनलाइन भी उपलब्ध हो सकेगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में चल रही भू-प्रशासन में इस डिजिटल पहल से न केवल समय की बचत होगी बल्कि संपत्ति की खरीद बिक्री में होने वाले अपराध और भ्रष्टाचार पर भी लगाम लगाई जा सकेगी। साथ ही लैंड यूज़ चेंज प्रक्रिया में सुधार और सरलीकरण से ग्रामीण क्षेत्रों में औद्योगिक निवेश में भी वृद्धि होगी, जिससे प्रदेश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / शिव सिंह