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खूंटी, 03 जनवरी (हि.स.)। जिले के मुरहू स्थित श्योर सक्सेस कोचिंग सेंटर में शनिवार को देश की प्रथम महिला शिक्षिका और समाज सेविका सावित्रीबाई फुले की जयंती महिला मुक्ति दिवस के रूप में मनाई गई।
कार्यक्रम की शुरुआत उनके चित्र पर पुष्प और माल्यार्पण कर की गई। मौके पर संस्थान के निदेशक सकलदीप भगत ने उनकी जीवनी पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सावित्रीबाई फुले का जन्म 3 जनवरी 1831 को हुआ था। फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रिंसिपल और पहले किसान स्कूल की संस्थापक थीं, जबकि उस दौर में महिलाओं को स्कूल जाना तो दूर, उन्हें घर से बाहर भी नहीं निकलने दिया जाता था। उनको महिलाओं और दलित जातियों को शिक्षित करने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। उन्होंने अपने जीवन को एक मिशन की तरह से जीया जिसका उद्देश्य था। उन्होंने कहा कि विधवा विवाह करवाना, छुआछूत मिटाना, महिलाओं की मुक्ति और दलित महिलाओं को शिक्षित बनाना। उनके संघर्ष ने महिलाओं को आत्मविश्वास, स्वावलंबन और समानता की भावना से परिपूर्ण किया। उन्होंने महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक किया और उन्हें स्वतंत्र निर्णय लेने की प्रेरणा दी। उन्होंने स्त्री शिक्षा के माध्यम से समाज में बदलाव की बुनियाद रखी। मौके पर कार्तिक, जिया अविनाशी, हर्ष सहित अन्य उपस्थित थे।
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हिन्दुस्थान समाचार / अनिल मिश्रा