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नैनीताल, 30 अगस्त (हि.स.)। माता नयना की नगरी नैनीताल में एक बेटी की तरह लगभग एक सप्ताह के लिए अपने मायके आयीं माता नंदा-सुनंदा श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ प्राकृत पर्वताकार रूप में सजने लगी हैं। अब वे रविवार सुबह ब्रह्म मुहूर्त में दर्शन देंगी।
शनिवार को सेवा समिति भवन में आयोजक संस्था श्रीराम सेवक सभा के चंद्र प्रकाश साह, भुवन बिष्ट, अमर साह, गोधन सिंह, हीरा सिंह, हरीश पंत, सागर सोनकर आदि कार्यकर्ता सुबह 9 बजे से ही मूर्ति निर्माण के कार्य में जुटे रहे। इसके उपरांत मूर्तियों में रंग भरने का कार्य मोनिका साह, आरती संभल व श्वेता के द्वारा किया गया।
बताया गया है कि मूर्तियों के निर्माण में बीते कुछ वर्षों की तरह पूरी तरह ईको-फ्रेंडली पदार्थों, कदली वृक्षों के साथ बांश की खपच्चियां, सूती कपड़े, पाती के पत्ते, रुई, धागे एवं प्राकृतिक रंगों का ही प्रयोग किया गया है, ताकि नैनी झील में विसर्जन के उपरांत भी इससे पर्यावरण को किसी तरह का नुकसान न हो। उधर नयना देवी मंदिर परिसर में पंडाल निर्माण का कार्य सभा के महासचिव मनोज साह की अगुवाई में हुआ, जबकि मंदिर परिसर में पूर्व अध्यक्ष मुकेश जोशी की अगुवाई में भंडारा भी प्रारंभ हो गया है। भंडारे व अन्य आयोजनों में दीपक साह, राजेश साह, राजेंद्र बिष्ट, मंजुल सनवाल, भगवान सिंह, रवि साह, तेज सिंह, आशु बोरा व तेज सिंह नेगी आदि कार्यकर्ता भी जुटे रहे।
फ्लैट्स मैदान में नगर पालिका-प्रशासन की ओर से आयोजित किये जा रहे मेले में खरीददारी और विभिन्न प्रकार के झूलों का चलना शनिवार से ही प्रारंभ हो गया है, जबकि पूर्व में मेला नंदाष्टमी के दिन से ही शुरू होता था। अलबत्ता, मेले में दुकानों के महंगी होने के आरोप भी लग रहे हैं। स्वयं नगर पालिका के लोग भी यह आरोप लगाते देखे जा रहे हैं।
प्रशासनिक अधिकारियों ने डॉग स्क्वॉड के साथ लिया मेले का जायजा
नैनीताल। प्रशासनिक अधिकारियों ने शनिवार को डॉग स्क्वॉड के साथ मेले का जायजा लिया। इस दौरान खास तौर पर मंदिर एवं मेला परिसर में सुरक्षा व्यवस्था एवं सफाई एवं पॉलीथीन का प्रयोग न करने के बाबत दुकानदारों को निर्देश दिये गये। नैनीताल होटल एवं रेस्टोरेंट एसोसिएशन के द्वारा दुकानदारों को पहली बार डस्टबिन उपलब्ध कराये गये हैं।
मंदिर परिसर में बलि इस वर्ष भी नहीं
इधर मेलाधिकारी केएन गोस्वामी ने बताया कि इस वर्ष भी मंदिर परिसर में बलि नहीं दी जाएगी। श्रद्धालु पूर्व वर्षों की तरह मंदिर में अपने बकरों को पूजा के लिये ला सकेंगे और यहां से पूजा के उपरांत अपने घरों अथवा तल्लीताल स्थित बूचड़खाने में बकरों की बलि दे सकेंगे।
हिन्दुस्थान समाचार / डॉ. नवीन चन्द्र जोशी