राइटर क्रैंप से ग्रसित अभ्यर्थी को दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश
प्रयागराज, 30 अगस्त (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को राइटर क्रैंप बीमारी से ग्रसित अभ्यर्थी को चार सप्ताह में दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने या ऐसा न करने का कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं
इलाहाबाद हाईकाेर्ट


प्रयागराज, 30 अगस्त (हि.स.)। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को राइटर क्रैंप बीमारी से ग्रसित अभ्यर्थी को चार सप्ताह में दिव्यांग प्रमाणपत्र जारी करने या ऐसा न करने का कारण स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।

यह आदेश न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा एवं न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार की खंडपीठ ने गोपाल की याचिका पर उसके अधिवक्ता ओम प्रकाश सिंह को सुनकर दिया है। याचिका में दिव्यांग होने के कारण लेखक की सुविधा दिए जाने की मांग की गई थी।

याची के अधिवक्ता ने कहा कि याची गोपाल राइटर क्रैंप बीमारी से ग्रसित है जिसकी पुष्टि एम्स दिल्ली व मेडिकल कॉलेज झांसी के डॉक्टरों ने की है। याची पीएचडी का छात्र है, जिसे पूर्व में दिल्ली विश्वविद्यालय द्वारा लेखक की सुविधा प्रदान की गई थी।

सर्वोच्च न्यायालय ने विकास कुमार बनाम यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन केस में यह व्यवस्था दी है कि राइटर क्रैंप की बीमारी से ग्रसित अभ्यर्थी को लेखक की सुविधा मिलना चाहिए, जो सेक्शन 58 अध्याय (10) के सब सेक्शन 2(एस) आरपीडब्ल्यूडी एक्ट 2016 की श्रेणी में आता है। केंद्र सरकार ने ऑफिस मेमोरेंडम जारी भी किया है, जिसे अन्य राज्यों के साथ यूपीएससी ने भी लागू किया है।

याची ने मुख्य चिकित्साधिकारी झांसी के समक्ष अपनी रिपोर्ट के आधार पर दिव्यांगता प्रमाण पत्र निर्गत करने की प्रार्थना की थी। जिस पर मुख्य चिकित्साधिकारी झांसी ने कोई निर्णय नहीं लिया तो यह याचिका दाखिल की गई।

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हिन्दुस्थान समाचार / रामानंद पांडे