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नैनीताल, 05 अगस्त (हि.स.)। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने हल्द्वानी के मुखानी चौराहा को जाम मुक्त कराए जाने और फ्लाई ओवर निर्माण करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार व नैनीताल जिलाधिकारी से पूछा कि जब हल्द्वानी के अन्य चौराहों से अतिक्रमण हटाकर चौड़ीकरण किया गया तो मुखानी चौराहा का चिन्हित अतिक्रमण क्यों नहीं हटाया गया। कोर्ट ने इस मामले में दो सप्ताह के भीतर प्रगति रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता एवं न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता पूरन चंद्र जोशी ने उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि हल्द्वानी के मुखानी चौराहा में आए दिन लगने वाले जाम को देखते हुए 2018 में फ्लाईओवर बनाने का सुझाव देने के बाद प्रशासन की ओर से लाखों रुपये खर्च कर सर्वे कराया गया। वर्षों बीत जाने के बाद भी अभी तक सर्वे रिपोर्ट पेश नहीं की गई है जबकि मुखानी चौराहा एसटीएच सहित अन्य अस्पतालों को जाने वाला मुख्य मार्ग है। यहां घंटों जाम लगा रहता है। शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर करने के लिए फ्लाईओवर की जरूरत हो रही है ताकि शहर आने वाले यात्री, छात्र और कर्मचारी तय समय गंतव्य तक पहुंच सके। याचिका में कहा कि कालाढूंगी रोड पर खासकर मुखानी चौराहा के पास आए दिन जाम की स्थित बनी रहती है। इससे स्कूल, कार्यालय समेत अन्य जरूरी कार्य के लिए इस मार्ग से आने-जाने वालों का अधिकांश समय जाम में ही व्यतीत हो जाता है। जाम से निजात दिलाने के लिए कालाढूंगी रोड पर फ्लाईओवर का निर्माण किया जाए। सरकार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि हल्द्वानी के तमाम चौराहों से अतिक्रमण हटा दिया गया है। सड़कों का चौड़ीकरण का कार्य चल रहा है लेकिन मुखानी चौराहा से अतिक्रमण हटाने के लिए 71 अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिया गया है। सरकार की ओर से बताया गया कि फ्लाईओवर बनाना दीर्घकालिक प्रोजेक्ट है, ऐसे में सड़क चौड़ी करने की जरूरत है।
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हिन्दुस्थान समाचार / लता