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धर्मशाला, 12 अगस्त (हि.स.)। भाजपा विधायक सुधीर शर्मा ने जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा भेजे जा रहे नोटिस की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुधीर शर्मा ने एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। शर्मा ने आरोप लगाया है कि उनके खिलाफ बदले की भावना से कार्रवाई की जा रही है और 'मीडिया ट्रायल' के जरिए उनकी छवि धूमिल करने का प्रयास हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें भेजा गया एक नोटिस उनके कार्यालय में पहुंचने से एक दिन पहले ही मीडिया में लीक कर दिया गया, जो सीधे तौर पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग और उन पर अनुचित दबाव बनाने की ओर इशारा करता है।
सुधीर शर्मा ने बुधवार को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में इस पूरे घटनाक्रम का खुलासा करते हुए बताया कि उन्हें एक नोटिस 12 अगस्त 2026 को उनके कार्यालय में आधिकारिक रूप से तामील किया गया। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यही नोटिस 11 अगस्त को ही मीडिया में उपलब्ध और प्रसारित कर दिया गया था। उन्होंने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि यह प्राकृतिक न्याय और निष्पक्ष प्रक्रिया के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। शर्मा का तर्क है कि जब नोटिस का उद्देश्य उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर देना था, तो उनके कार्यालय में पहुंचने से पहले ही इसे सार्वजनिक डोमेन में क्यों और कैसे लाया गया? उन्होंने इसे उनके खिलाफ सार्वजनिक धारणा बनाने की एक सोची-समझी साजिश करार दिया।
मामले के पीछे की असली वजह बताते हुए शर्मा ने एक और गंभीर खुलासा किया। उन्होंने बताया कि यह पूरी कार्रवाई उनके द्वारा उठाए गए एक कानूनी कदम के बाद शुरू हुई है। दरअसल, उन्होंने हाल ही में धर्मशाला के माननीय अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष विजिलेंस अधिकारियों के कथित उत्पीड़न के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की थी। उनका आरोप है कि विजिलेंस अधिकारियों के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाने के ठीक बाद, प्रतिशोध के रूप में उन पर यह एफआईआर दर्ज कर दी गई। शर्मा के अनुसार घटनाओं का यह क्रम स्पष्ट करता है कि जांच प्रक्रिया का इस्तेमाल उन्हें डराने और अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करने से रोकने के लिए किया जा रहा है।
न्यायपालिका और कानून के शासन में अपना पूर्ण विश्वास जताते हुए सुधीर शर्मा ने इस पूरे प्रकरण की किसी स्वतंत्र, निष्पक्ष और राजनीतिक दबाव से मुक्त प्राधिकारी से जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या कोई व्यक्ति अगर किसी प्राधिकारी के खिलाफ न्यायालय से कानूनी संरक्षण मांगता है, तो उसे जांच के नाम पर इस तरह के दबाव का सामना करना पड़ेगा?
शर्मा ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी कानूनी जांच में पूर्ण सहयोग करने को तैयार हैं, लेकिन वे जांच के नाम पर बनाए जा रहे किसी भी सरकारी या राजनीतिक दबाव के आगे नहीं झुकेंगे और कानून के अनुसार अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / सतेंद्र धलारिया